तेंदुए के जबड़े से बेटी को बचाया,

    • घायल बच्ची का नागपुर में चल रहा इलाज

    चंद्रपुर. मां चाहे इंसान हो या पशु यदि उसके बच्चे पर कभी आफत आती है, तो वह रौद्र रूप लेकर उसकी रक्षा करती है. ऐसी ही एक घटना 15 दिनों पूर्व शहर के समीप जूनोना ग्राम में सामने आई. यह रोमहर्षक घटना इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. जिसमें एक मां ने अपनी नन्हीं बेटी को तेंदुए के जबड़ों में मौत के करीब देखा, तो डंडे से तेंदुए को पीट-पीटकर बच्ची की जान बचाई. मासूम का नागपुर के निजी अस्पताल में उपचार शुरू है.

    चेहरे की हड्डियां हुईं क्षतिग्रस्त 

    1 जुलाई की सुबह 5.30 बजे इस घटना में जूनोना निवासी अर्चना मेश्राम ने अपनी 5 वर्षीय प्राजक्ता को तेंदुए के चंगुल से छुड़ाया. तेंदुए के हमले में बुरी तरह घायल प्राजक्ता का चंद्रपुर में उपचार होने के बाद उसे नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसके चेहरे की क्षतिग्रस्त हड्डियों का आपरेशन कर उसकी जान बचाई गई है.

    …और तेंदुए से भिड़ गई मां

    शहर से सटे जूनोना गांव में संदीप मेश्राम अपने परिवार के साथ रहता है. सुबह मां अर्चना को घर से निकलकर बाहर जाता देख, उसके पीछे प्राजक्ता निकल पड़ी. पास नाले के करीब शिकार की टोह में बैठे तेंदुए ने नन्ही प्राजक्ता को अपने जबड़े में ले लिया. यह देख अर्चना तुरंत बच्ची को बचाने के लिए तेंदुए से जा भिड़ी.

    पास की पड़े एक डंडे को उठा कर उसने तेंदुए के सिर पर दे मारा. डंडे का जोरदार वार लगते ही तेंदुए ने प्राजक्ता को छोड़ दिआ और अर्चना पर हमला कर दिया. किसी तरह से तेंदुए के हमले से अर्चना ने स्वयं को बचाया. फिर से बच्ची पर हमला करता देख अर्चना ने रौद्र रूप लेकर तेंदुए को पीटना शुरू कर दिया. लगातार वार से तेंदुआ वहां से जंगल की ओर भाग निकला. हमले में बुरी तरह घायल प्राजक्ता को लहूलुहान लेकर वह घर पहुंची और उसे तुरंत जिला सामान्य अस्पताल पहुंचाया गया.

    जहां से उसे नागपुर के निजी अस्पताल में रवाना किया गया. प्राजक्ता के जबड़े का ऊपरी हिस्सा कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है. उसकी एक आंख बंद नहीं हो पा रही थी. नागपुर में उसका उपचार शुरू है. अर्चना के साहसिक कारनामे की घटना सुर्खियों में आने के बाद अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. सभी अर्चना के साहस की सराहना कर रहे हैं.