congress, vijay wadettiwar and Dhanorkar

  • किसान व कामगार विरोधी विधेयक का तीव्र विरोध
  • पत्रपरिषद में पालकमंत्री वडेट्टीवार की जानकारी

चंद्रपुर. केंद्र की मोदी सरकार ने किसान व कामगार विरोधी विधेयक संसद में पारित कराया। उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश से यह विधेयक पारित किया गया। विधेयक का विरोध करने पर आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस से लाठीचार्ज कराया। संसद में किसी भी पार्टी के नेताओं बिना चर्चा किए। मनमानी कर विधेयक पारित कर इसे किसानों पर जबरन थोंपा जा रहा है। इसका कांग्रेस ने विरोध किया है। केंद्र सरकार की इस भूमिका के खिलाफ चलाए गए आंदोलन का दूसरा चरण 2 अक्टूबर शुरू होने जा रहा है। जिसमें बैलगाडी मोर्चा, हस्ताक्षर अभियान, धरना आंदोलन लिए जाने की जानकारी आयोजित पत्रपरिषद में पालकमंत्री विजय वडेट्टीवार ने दी।

उन्होने पत्रपरिषद में बताया कि, केंद्र सरकार ने केवल उद्योगपति व धनाढ्यों को लाभ पहुंचाने के उद्देश से किसान व कामगार विरोधी तीन विधेयक को संसद में जबरन मंजूर करा लिया। इस कानून से किसान समेत, कृषि उपज बाजार समिति, व्यापारी, माथाडी कामगारों को काफी नुकसान झेलना पड सकता है। पहले की मानसून के बदलाव के चलते खेतियों में फसल ना होने से किसान पहले से ही त्रस्त है। उसके बाद इस तरह के विधेयक लाकर किसानों व कामगारों को बरबाद करने का षडयंत्र केंद्र की मोदी सरकार कर रही है।

इस विधेयक को लेकर किसानों ने सडकों पर आंदोलन करते हुए विधेयक का तीव्र विरोध किया। परंतु सरकार पुलिस प्रशासन पर दबाव डालकर किसानों का आवाज बंद करने के लिए उनपर लाठीचार्ज करवाया। केंद्र सरकार की इस तरह की मनमानी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व सांसद राहुल गांधी के निर्देश पर किसान विरोधी विधेयक के खिलाफ देश में 24 सितम्बर से आंदोलन छेडा है। आंदोलन का पहला चरण 26 सितम्बर को किया गया। जिसमें किसान विधेयक का विरोध किया गया।

आंदोलन का दूसरा चरण 2 अक्टूबर  को गांधी चौक में धरना आंदोलन व 2 करोड हस्ताक्षरों की मुहिम चलाकर किसान मजदूर बचाव आंदोलन को सफल किया जायेगा। तत्पश्चात तहसील स्तर पर यह आंदोलन चलाया जायेगा। 10 अक्टूबर को तहसील स्तर पर इन विधेयकों के बारे में किसान व नागरिकों को मार्गदर्शन किया जायेगा। 31 तक अखिल भारतीय कांग्रेस की ओर से इन विधेयकों के खिलाफ विविध आंदोलन किए जाने की जानकारी पालकमंत्री वडेट्टीवार ने दी।     

किसान व नागरिकों पर जबरदस्ती थोपा बिल- सांसद धानोरकर
किसानों व कामगारों के लिए घातक तथा उद्योगपति व कंपनी मालिकों के लिए लाभदायक साबित होनेवाले यह बिल विरोधी पार्टी के नेताओं से किसी भी प्रकार की चर्चा किए बिना लाया गया है। कोई भी बिल पारित करने से पहले विपक्ष से चर्चा करना अनिवार्य है। राज्यसभा में बहुमत नही होने के कारण आवाजी मतदान से यह विधेयक राज्यसभा में पारित किया गया। जिस तरह मोदी सरकार ने जीएसटी बिल नागरिकों पर जबरदस्ती से थोपा है उसी तरह किसान व कामगार विधेयक नागरिकों पर थोपने का आरोप सांसद बालु धानोरकर ने किया है।