सीटीपीएस और एसीसी सीमेंट कंपनी को कारण बताओ नोटिस

  • एअर प्रिवेन्शन एन्ड कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन
  • 7 दिनों के भीतर मांगा जवाब
  • प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कार्रवाई

चंद्रपुर. वायु और जल प्रदूषण के चलते प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केन्द्र और घुग्घुस स्थित एसीसी सीमेंट कंपनी को आज सोमवार को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है.

लॉकडाऊन के समय सीटीपीएस और एसीसी सीमेंट कंपनी समेत अन्य उद्योगों के प्रदूषण में काफी कमी आयी थी परंतु अनलॉक के फिर से प्रदूषण घातक स्थिति पर पहुंचने से लोगों के लिए काफी परेशानी खड़ी हो गई थी. तडके प्रदूषण के कारण कोहरे की स्थिति निर्माण हो जाती है. नागरिकों को सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रह थी. दमा, हदयविकार, त्वचारोग, आंखों की बीमारी, कैन्सर, टीबी जैसे रोग बढ गए है.

प्रदूषण नियंत्रण मंडल को केन्द्र से काला धुआं बाहर निकलने और इरई नदी पुल केपास तेल नदी में छोड़े जाने की शिकायत मिली थी. इसके बाद मंडल के अधिकारियों ने 25 नवंबर 2020 को सीटीपीएस पहुंचकर जायजा लिया था. दाताला मार्ग पर इरई नदी के तल पर तेल नजर आ रहा था. कोयले के भंडारण के पास ही नाले से तेल छोडे जाने का सामने आया.

अप्रोच रोड कोल गेट से बड़े पैमाने पर ट्रान्सपोर्टिंग के जरीये प्रदूषण होने का सामने आया. यूनिट क्र. 8 और 9 से 3 दिसंबर को बड़े पैमाने पर काला धुआं छोड़ा गया. जिससे हवा और पानी प्रदूषित हुआ था.सीटीपीएस और एसीसी सीमेंट कंपनी दोनों ही एअर प्रिव्हेन्शन एन्ड कंट्रोल  एक्ट 1981 के अनुसार कार्रवाई संकेत महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रादेशिक अधिकारी ए.एम करे ने दिए है. आगामी सात दिनों में जवाब मांगा है.

घुग्घुस स्थित एसीसी सीमेंट कंपनी प्रबंधन द्वारा पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन किया है. बारंबार सूचित किए जाने के बाद कंपनी ने कोई उपाय नहीं किए. एसीसी सीमेंट कंपनी के दस मीटर दूरी पर ही स्कूल है जिससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर हो रहा है. निरीक्षण के दौरान कंपनी द्वारा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किसी तरह कोई उपाययोजना नहीं किए जाने का पाया गया.

हैन्डलिंग विभाग में क्लिनिंग के लिए किसी भी तरह की पानी की व्यवस्था नहीं थी. प्रवेशद्वार के पास ही कोयले का भंडार पाया गया. पैकिंग विभाग में प्रदूषण नियंत्रण के उपकरण पड़े हुए थे.वायु प्रदूषण नियंत्रण का उल्लंघन और प्रदूषण नियंत्रण कानून 1974  के तहत नोटिस दी गई है.  यहां नमूने जमा कर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए है.