अदरक की खुशबू से महकी भिसी कि फिजाएं

  • मक्का भी लहराया, लाकडाऊन में किसान का नया प्रयोग
  • पारंपारीक खेती छोड आधुनिक खेती की ओर बढे कदम

भिसी. चिमूर तहसील में धान, सोयाबीन, कपास, तुअर, चना आदि फसलो का उत्पादन प्रमुखता से किया जाता है. इन फसलों की वजह से चिमूर तहसील को भी झाडीपट्टी के नाम से जाना जाता है. परंतु इन पारम्पारिक फसलों को तिलांजली देते हुए भिसी गांव के एक युवा किसान मनोज डोंगरे ने आधुनिक तरीके से खेती करते हुए लॉक डाऊन के समय अपने खेत में अदरक की  रोपाई कर युवा किसानों के लिए नई मिसाल खडी की है. इस युवा किसान मनोज ने मेहनत व लगन से भिसी गांव की हवाओ में अदरक कि खुशबु फैलायी है. संपुर्ण चिमूर तहसील में अदरक व मका की खेती करनेवाला यह एकमेव किसान है. 

गोंदीया, भंडारा, गडचिरोली तथा चंद्रपुर जिले में धान की पैदावार अधिक पैमाने में ली जाती है. इसी वजह से इस इलाके को झाडीपट्टी के नाम से जाना जाता है. अप्पर तहसील भिसी निवासी युवा किसान मनोज डोंगरे ने कला शाखा में स्नातक की डिग्री हासिल की है. आगे चलकर सिविल मे डिप्लोमा कर ठेकेदारी शुरु कर अपने परीवार का निर्वाह शुरू किया. कोरोना संक्रमण के चलते लाकडाऊन की वजह से निर्माण व्यवसाय ठप्प पड गया. मनोज ठेकेदारी के साथ -साथ पुरखों से मिली खेती भी किया करता था. परंतु खेती करने का तरीका पारंपारीक रहने से खेती हमेशा घाटे में रहती थी. लॉकडाऊन के दौरान मनोज ने खेती में कुछ नया करने का निर्णय लेकर खेत में अदरक लगाने की ठान ली.

महाराष्ट्र के लातूर, उस्मानाबाद, नांदेड जिलें में तथा आंध्र प्रदेश में अदरक की काफी पैदावार की जाती है. मनोज ने लातूर जिलें के उदगीर तहसील से पांच क्वींटल अदरक की बिजाई लाकर अपने खेत में एक एकड जगह में रोपाई की. मनोज ने माहीम नाम के अदरक कि रोपाई 30 मई को की. अब यह अदरक की फसल अगले वर्ष फरवरी, मार्च माह में पककर तयार हो जाती है.

हलदी की रोपाई के लिए जिस तरह के बडे (वाफे) बनाए जाते है, उसी प्रकार के बडे वाफे अदरक के लिए बनाए गए है. अदरक कि फसल को छांव की आवश्यकता जरूरी है. इसलिए उनके बीच मक्का फसल लगायी है. चिमूर तहसील व भिसी क्षेत्र में मक्का व अदरक की खेती करनेवाला पहला युवा किसान है. 

एक एकड में अदरक की फसल लगाई गई है. अदरक का बाजार भाव 14 हजार रूपए क्वींटल है. एक एकड में 30 से 40 क्वींटल की फसल होने के आसार है. फसल का कुल खर्च डेढ दो लाख रुपए तक हो सकता है. तथा फसल बेचने पर पाच से छह लाख रुपए मिलने का अंदाजा होने की बात मनोज ने बताई. कम जगह में पारम्पारिक तरीके से की जाने वाली खेती को छोड आधुनिक तरीके से खेती करने वाले मनोज युवा किसानों के लिए मिसाल बन गए है. मनोज की मेहनत से भिसी की हवाओं में अदरक की खुशबु फैली है.

लॉकडाउन में सभी व्यवसाय ठप्प हो गए थें. ऐसे में अपने पुरखों कि खेती में ही कुछ नया करने की ठान ली. खेत में अदरक लगाने का विचार मन में आया. खेत में अदरक, मक्का, मिरची, प्याज तथा हलदी की फसल लगाई है. पानी की कमी के चलते तथा नई फसल का अनुभव नही होने से इस वर्ष फसल की पैदावार थोडी कम होगी. अगले वर्ष फसल सिंचाई के लिए पानी की ड्रीप सिस्टीम लगाने का कार्य शुरू करने की योजना है. अन्य किसानों ने भी पारम्पारिक खेती छोड कर आधुनिक तरीके से खेती कि ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. – मनोज डोंगेरे, युवा किसान, भिसी