young man went missing in Mahabaleshwar forest
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    चंद्रपुर: वन परिक्षेत्र अधिकारी पद से निलंबित एल.एस.शहा ने मुख्यवनसंरक्षक चंद्रपुर को निवेदन देकर कहा है कि उनका पक्ष सुने बिना ही उन पर निलंबन की कार्रवाई की गई है. किसी भी सरकारी अधिकारी एवं कर्मियों को निलंबित किए जाने से पूर्व उसे तीन बार नोटिस दिया जाता है और उसकी ओर से जवाब मांगे जाने के बाद जवाब संतोषजनक ना होने पर ही उसे निलंबित किया जाता है परंतु उनके मामले में सीधे पहला नोटिस थमा कर निलंबन की एकतरफा कार्रवाई की गई है. इससे वह काफी मानसिक परेशानियों का सामना कर रही है. उसकी स्थिति भी अमरावती की वनाधिकारी दीपाली चव्हाण की तरह हो सकत है.

    वनपरिक्षेत्र अधिकारी शहा का कहना है कि मेरे संदर्भ में बिना जांच पड़ताल किए और बिना मुझे सूचित किए ही उपवनसंरक्षक ब्रम्हपुरी वनविभाग ब्रम्हपुरी ने मेरे अधीनस्थ कर्मचारियों की सभा ली. इस सभा में कर्मचारियों ने मौखिक प्रश्नों के उत्तर दिए. मै पिछले 16 वर्षों से शासकीय डयूटी पर कार्यरत हूं मुझे काफी काम का अनुभव है. मैने सभी कर्मचारियों को समय समय पर उचित आदेश दिए और सूचना का पालन करने के लिए उनका मार्गदर्शन किया. उनकी अडचनों का समाधान किया है.

    इसके बावजूद उपवनसंरक्षक ब्रम्हपुरी वनविभाग ने मुझ पर झूठे आरोप लगाकर निलंबन की कार्रवाई की है.  संबंधित अधिकारी उन्हें रात बेरात संपर्क कर गालीगल्लौच करते है, मुझे सस्पैंड करने की धमकी देते, मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. दीपाली चव्हाण की तरह मेरी हालत की जारही है ऐसा आरोप शहा ने लगाया है. शहा ने निलंबन तुरंत वापस लेने की विनंती की है.