स्वयं की पहचान खोज रहा पुरातन मंदिर

  • मंदिर को स्वच्छता व पुननिर्माण की प्रतिक्षा

चंद्रपुर. चंद्रपुर मूल मार्ग पर घंटोचौकी के पास 12वीं सदी से मौजुद पुरातनकालीन मंदिर पिछले कई वर्षो से स्वयं के पहचान की खोज में है. वैसे से तो यहां पुरातनकालिन शिव मंदिर है. तो कुछ लोग गणेश मंदिर समझकर पुजा कर रहे है. किसी ने मंदिर के सामने विष्णु मंदिर का फलक लगाया जिससे यहां वास्तविक रूप से किसका मंदिर है यह अभीतक ज्ञात नही हो पा रहा है.  

शिवलिंग व गणेश मूर्ति से मिली पहचान   

मंदिर में पुरातन काल से शिवलिंग है. परंतु यह खंडीत होने से उसे मंदिर के बाहर रखा गया है. कुछ वर्ष पहले बंगाली बांधवों ने मंदिर को स्वच्छ कर गर्भागार में गणेश मूर्ति स्थापित कर उसकी पुजा की जा रही है. जिससे इस मंदिर को कुछ लोग शिवमंदिर तो कुछ लोग गणेश मंदिर के नाम से प्रचलित हुआ है. 

मंदिर में विष्णु मंदिर को कोई प्रमाण नही 

संबंधित पुरातन मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति नही है. ओर नाही विष्णु मंदिर के कोई अवशेष पाए गए. किसी अज्ञात व्यक्ति ने मंदिर परिसर में विष्णु मंदिर का फलक तैयार कर उसका विष्णु मंदिर के नाम से नामकरण किया. अब यह मंदिर विष्णु मंदिर के नाम से जाना जा रहा है. 

मंदिर अस्तित्व हेतु जनजागरण मुहिम   

मंदिर चंद्रपुर मूल सडक से दूर होने से मंदिर स्वच्छता की ओर अनदेखी हो रही है. भाविकों की मंदिर में चहलपहल कम होने से शासन व प्रशासन की अनदेखी हो रही है. ऐसे में ईकों प्रो अध्यक्ष बंडु धोतरे व उनकी टिम द्वारा मंदिर की स्वच्छता व पुननिर्माण प्रयास किए जा रहे है जो सराहनीय है. अब इस कार्य में कई लोग जुड रहे है. मंदिर सफाई व पुनर्निमाण हेतु व्हाटस एप ग्रुप तैयार कर जनजागरण मुहिम की जा रही है. 

4 वर्ष पहले किया मंदिर का निरिक्षण-इतिहासतज्ञ ठाकुर  

इतिहासतज्ञ अशोकसिंग ठाकुर ने बताया, मंदिर की स्वच्छता व पुननिर्माण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है. परंतु लापरवाही के चलते जिले के कई पुरातन मंदिर की ओर अनदेखा किया जा रहा है. 4 वर्ष पहले राज्य पुरातत्व विभाग ने मंदिर का निरिक्षण कर उसका आरक्षित सूची में समावेश किया था. परंतु अभीतक मंदिर की स्वच्छता व पुनर्निमाण का विषय प्रलम्बित है. मंदिर पर मौजुद मूर्तियां कही पर नही होने का दावा इतिहासतज्ञ ठाकूर ने किया है. मंदिर से कई मुर्तिया घंटाचौकी गांव के मंदिर में लेकर जाने की जानकारी उन्होने दी.