नहीं हो सका अमलनाला का गहराईकरण

    •  अनदेखी: जलसंवर्धन विभाग ने फरवरी व मार्च में दिए थे आदेश

    चंद्रपुर. कोरपना तहसील के गड़चांदूर समीप स्थित अमलनाला को पर्यटक घोषित कर उसे विकसित करने का काम हाल में शुरू किया गया है. किंतु इस तालाब के गहराईकरण के संबंध में जलसंवर्धन मंत्रालय ने फरवरी मार्च को भेजे 2 पत्र में दिए थे. किंतु स्थानीय सिंचाई विभाग ने पत्र की ओर ध्यान नहीं दिया और अमलनाला का गहराईकरण नहीं हो सका और अब बरसात शुरू होने से यह काम अगले ग्रीष्मकाल के दौरान ही हो सकेगा.

    विकसित हो रहा पर्यटक स्थल

    अमलनाला को विकसित करने के काम का उद्घाटन जिले के पालकमंत्री विजय वडेट्टीवार के हाथों किया गया. तालाब में नौका विहार, बगीचे, रेस्टारंट, वाटरफाल, गजेबो आदि का काम होगा. दूसरे स्टेज में वेस्टवेयर, घाटरोड सौंदर्यीकरण, गार्डनिंग, अमलनाला तक पहुंचने का मार्ग आदि के कार्य प्रस्तावित है.

    इससे गड़चांदूर परिसर के बेरोजगारों को रोजगार के अवसर प्रदान होने के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलने से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी. टेंडर मिलने के बाद चंद्रपुर के मे. ओम साईं व्यंकटेश्वरा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अमलनाला को पर्यटक स्थल विकसित करने का काम शुरू कर दिया है.

    समाजसेवी इबादुल हसन सिद्दीकी के लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2018 में तत्कालीन वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कोरपना तहसील के अमलनाला और वरोरा तहसील के चारगांव को पर्यटक स्थल घोषित किया था. इस दौरान विकास के लिए 7 करोड़ रुपए भी घोषित किए गए. किंतु कोरोना संक्रमण आने से काम अधर में अटक गया है.

    आदेश पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

    1985 में बने अमलनाला बांध परियोजना में बरसात के दिनों में प्रतिवर्ष सैकड़ों टन मिट्टी पानी के साथ बहकर जमा हो रही है. इसकी वजह से तालाब की गहराई कम होती जा रही है. पर्यटक स्थल घोषित किए जाने के बाद बोटिंग के लिए तालाब में 12 महीने पर्याप्त जलभंडार आवश्यक होता है.

    इसलिए घुग्घुस के समाजसेवी ने जनवरी 2021 में जिले के दौरे पर आए जलसंवर्धन मंत्री जयंत पाटिल को ज्ञापन सौंपकर अमलनाला के गहराईकरण की मांग की थी. इस मांग का संज्ञान लेते हुए जलसंवर्धन विभाग ने 24 फरवरी और 22 मार्च को जिले के सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर अमलनाला के गहराईकरण के आदेश दिए थे. क्योंकि ग्रीष्मकाल में पानी भी कम होता है, इसकी वजह से गहराईकरण का काम आसानी से हो सकता था.

    किंतु सिंचाई विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और अब बरसात का मौसम शुरू हो गया है. अब अमलनाला के गहराईकरण का काम अगले ग्रीष्मकाल अर्थात पूरे 8 महीने बाद ही संभव होगा. यह सिंचाई विभाग की अनदेखी और लापरवाही की वजह से होने का आरोप सिद्दीकी ने लगाया है.

    गहराई से बढ़ेगी जलसंग्रह क्षमता

    अमलनाला को बने आज 35 वर्षों से अधिक समय बीत गया है. गहराईकरण की वजह से अमलनाला में अधिक जल संचित होकर झील का रूप मिल सकेगा. तालाब में बारहमाही पानी रहने पर पर्टयक अधिक संख्या में आकर्षित होकर नौका विहार का आनंद उठा सकेंगे और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. शुरू में बांध की ऊंचाई 37.75 मीटर थी.

    बांध के पानी से परिसर के किसानों की 8,417 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाती थी. बाद में बांध की ऊंचाई बढ़ाई गई, किंतु गहराईकरण नहीं किया गया. गहराईकरण से अमलनाला में अधिक पानी जमा होने पर किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल पाएगी. साथ ही गड़चांदूर शहर को पेयजल मिलेगा.