The farmers staged a sit-in movement

वनविभाग जिस तरह वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रयास करता है, उसी तरह वन विभाग ने किसानों, खेतिहर मजदूरों के जीवन की रक्षा के लिए शीघ्र बाघ को पिंजरे में कैद करना चाहिए।

  • बाघ को पिंजरे में कैद नहीं कर सकते तो शूट करें-विधायक सुभाष धोटे
  • बाघ को पकड़ने के पुरे प्रयास किये जा रहे है – उपविभागीय वन अधिकारी

राजुरा. वनविभाग जिस तरह वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रयास करता है, उसी तरह वन विभाग ने किसानों, खेतिहर मजदूरों के जीवन की रक्षा  के लिए शीघ्र बाघ को पिंजरे में कैद करना चाहिए। नहीं पकड़ सकते तो उसे शूट करना चाहिए। 7 दिनों में बाघ का बंदोबस्त नहीं होने पर चंद्रपुर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने रास्ता रोको, धरना प्रदर्शन की चेतावनी विधायक सुभाष धोटे ने राजुरा एवं विरुर स्टेशन वन परिक्षेत्र में दहशत मचा रखे बाघ को लेकर वन विभाग कार्यालय के सामने आज सोमवार को धरना प्रदर्शन में दी।

राजुरा एवं विरुर स्टेशन वन परिक्षेत्र में बढ़ रही बाघ की दहशत को लेकर वन विभाग कार्यालय के सामने रास्ता रोको आंदोलन किया जाने वाला था लेकिन पुलिस के अनुरोध पर रास्ता रोको न करते हुए धरना प्रदर्शन किया गया। धरना प्रदर्शन में खेतकरी, शेतमजुर समन्वय समिति, टेम्भुरवाही, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की ओर से बाघ का शिकार बने परिजनों के नौकरी, मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 25 लाख मुआवजा, गंभीर जख्मी होने की दशा में 15 लाख, जंगली सुअरों के आतंक से मुक्ति, जंगली जानवरों से नुकसान हुए फसल की नुकसान भरपाई के पंचनामे करने आदि विभिन्न मांगे की गई।

आंदोलनकारियों को उपविभागीय वनअधिकारी अमोल गरकल ने बताया कि बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मुस्तैदी से कार्य कर रहे है। साथ ही विभिन्न गांव के 200 लोग भी इसे पकड़ने के जुटे है, बाघ की पल पल की खबर रखने के लिए 160 कैमरे लगाए गए है। 3 वैद्यकीय अधिकारी तथा 2 शूटरों की सहायता ली जा रही है। आने वाले 7-8 दिनों में बाघ को पकड़ने के लिए पुरे प्रयास किये जायेंगे। इस दौरान उपविभागीय वनअधिकारी अमोल गरकल ने आंदोलनकारियों से निवेदन स्वीकारा। 

सर्वप्रथम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आंदोलन की शुरुवात की गई। आंदोलनकारी पैदल वन विभाग कार्यालय के सामने पहुंचे। आंदोलन में विधायक सुभाष धोटे, पूर्व विधायक एड. संजय धोटे, पूर्व जिप सदस्य अविनाश जाधव, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बाबूराव मडावी उपस्थित रहने से आंदोलन सर्वपक्षीय हो गया। आंदोलन में चेतन जयपुरकर, चरणदास टोडासे, स्वामी संगमवार, जीवन आमने, मल्लेश आत्राम, शंकर धोंडगे, राम धुमने, अशोक अमृतकर, दीपक मडावी, अर्जुन अलगमवार उपस्थित थे।

वन विभाग की ओर से उपविभागीय वनअधिकारी अमोल गरकल, वनपरिक्षेत्र अधिकारी विदेशकुमार गलगट एवं अन्य वन अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे। पुलिस उपनिरीक्षक एस.जी. झुरमुरे के नेतृत्व में एपीआई  गोडसे, साखरे, मेश्राम मेजर ने पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त था।