बारहवीं की पुनः परीक्षा की तैयारी में जुटे हजारों छात्रों का भविष्य अधेरे में

    • महाराष्ट्र सरकार की अंक आवंटन नीति में ऐसे छात्रों का उल्लेख नहीं

    चंद्रपुर. कोरोना महामारी के चलते महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकंडरी एंड हायर सेकंडरी एजुकेशन ने राज्य में दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं तो रद्द कर दी और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर उन्हें अंक अंक प्रदान करने का निर्णय तो ले लिया है, किंतु पिछले वर्ष बारहवीं में प्राप्त अंकों से असंतुष्ट होकर पुनर्परीक्षा की तैयारी कर रहे राज्य के हजारों छात्रों का भविष्य अब अधर में पड़ गया है.

    नीट, जेईई जैसे पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक पीसीबी या पीसीएम ग्रुप में पर्याप्त अंक नहीं मिलने पर राज्य में प्रतिवर्ष बारहवीं के हजारों छात्र पुनः परीक्षा के लिए अपने अपने शिक्षा संस्थानों से शिक्षा मंडल के पास आवेदन प्रस्तुत करते है. तथा वे घर से ही बारहवीं की परीक्षा की तैयारी शुरू करते है.

    उनका उद्देश्य यहीं होता है कि, पिछली बार की तुलना में इस बार पीसीएम अथवा पीसीबी ग्रुप में अच्छे अंक प्राप्त हो, परिणामतः वे मेडिकल अथवा इंजीनियरिंग की शिक्षा के लिए आवश्यक नीट या जेईई जैसी परीक्षा के लिए क्वालिफाइड हो सकें.

    वर्ष 2020 को स्टेट बोर्ड द्वारा महाराष्ट्र के विभिन्न विभागीय शिक्षा मंडलों द्वारा ली गयी बारहवीं की परीक्षा में उपरोक्त प्रवेश परीक्षाओं के लिए पीसीएम या पीसीबी ग्रुप में आवश्यक 150 अंकों से कम अंक आने पर राज्य से हजारों छात्रों ने पुनः परीक्षा के लिए अपने अपने शिक्षा संस्थान के पास आवेदन प्रस्तुत किये थे. शिक्षा मंडल के अकेले नागपुर विभाग से ऐसी पुनः परीक्षा देने के लिए आवेदन प्रस्तुत करनेवाले छात्रों की संख्या 1500 से अधिक बताई जा रही है.

    बारहवीं की पुनः परीक्षा की जोर शोर से तैयारी कर रहे उक्त छात्रों को उस वक्त झटका लगा था जब राज्य सरकार ने कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं रद्द करने का एलान किया.

    महाराष्ट्र सरकार ने बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए अंकों के आवंटन की नीति का भी एलान किया है.  इस नीति के तहत छात्रों के कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं की आंतरिक परीक्षाओं में कॉलेज आधारित मूल्यांकन और 10 वीं की परीक्षाओं में तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले विषयों को औसत माना जाने वाला है.

    छात्रों का कहना है कि, यह नीति रेगुलर विद्यार्थियों के लिए तो ठीक है, लेकिन पिछले वर्ष बारहवीं की परीक्षा दे चुके और पीसीएम या पीसीबी ग्रुप में असंतुष्ट अंक हासिल करने के बाद इम्प्रूवमेंट टेस्ट के लिये इस वर्ष पुनः परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के बारे में राज्य सरकार ने कोई सोचविचार नहीं किया है.

    ऐसे छात्रों का मूल्यांकन कैसे होगा, उन्हें किस आधार पर अंकों का आवंटन होगा, क्या उनका यह शिक्षा सत्र व्यर्थ जाएगा, क्या उन्हें नीट अथवा जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए पीसीएम या पीसीबी ग्रुप में अच्छे अंक पाने की उम्मीद को त्यागना पड़ेगा जैसे कई सवाल अब पुनः परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सता रहे है. राज्य सरकार ने मूल्यांकन के वक्त ऐसे छात्रों के बारे में भी सोचने की आवश्यकता छात्रों ने जताई है.