जिले के सुरक्षारक्षकों पर भूखों मरने की नौबत

  • प्रशासन की लापरवाही का नतीजा
  • 7 दिन में मांगें नहीं मानी तो आंदोलन की चेतावनी

चंद्रपुर. प्रशासन की लापरवाही के कारण जिले के सुरक्षारक्षक कामगारों पर भूखों मरने की नौबत आ गई है. कामगारों के वेतन एवं अन्य विभिन्न मांगों को सात दिनों के भीतर मान्य नहीं किया गया तो आंदोलन की चेतावनी कामगार नेता छोटू शेख ने उपजिलाधिकारी, सहायक कामगार आयुक्त को सौपे गए निवेदन में किया है. निवेदन की प्रतिलिपि जिले के पालकमंत्री विजय वडेट्टीवार, स्वास्थ्य मंत्री, कामगार मंत्री, सासंद बालू धानोरकर को सौपी गई है.

चंद्रपुर-गडचिरोली जिले के शासकीय अस्पतालों में पिछले डेढ वर्ष से महाराष्ट्र सरकार सुरक्षा मंडल की ओर से सेवा देने का काम सुरक्षा रक्षक कामगार कररहे है. उनके प्रलंबित वेतन एवं अन्य मांगों की पूर्ति नहीं होने से उनपर और उनके परिवार पर भूखों मरने की नौबत आ गई है. जबकि यह कामगार कोरोना महामारी के समय भी अपने जान की परवाह किए बिना चिकित्सकों और स्थायी स्वास्थ्य कर्मियों के साथ सेवा देते आरहे है.

चंद्रपुर-गडचिरोली जिले के सुरक्षा रक्षक कामगारों की प्रमुख मांगों में छह से दस माह का बकाया वेतन दिया जाए, 11 पूर्व का सहायक कामगार आयुक्त द्वारा 10 सुरक्षा रक्षक कामगारों का विशेष प्रावधान के रूप में मंजूरी के लिए मुख्य कामगार आयुक्त मुंबई को भेजा गया प्रस्ताव मंजूर किया जाए, सभी सुरक्षा रक्षकों को बोनस एवं अन्य सुविधा दी जाए, सभी सुरक्षा रक्षक कामगारों को यूनिफार्म एवं अन्य कामों केसमय लगनेवाली सामग्री दी जाए, इससे पूर्व पिछले 10 से 20 वर्षों से सेवा दे रहे सुरक्षा रक्षकों को सेवा से 2019 में निलंबित कर दिया गया था उन्हें जिन स्थानों पर आवश्यकता है वहां लिया जाए आदि मांगों का समावेश है.

इन मांगों का निपटारा नहीं किए जाने पर आगामी सप्ताह भर बाद दोनों ही जिलों के सभी सुरक्षा रक्षक कामगारों को लेकर जिलाधिकारी, सहायक कामगार आयुक्त कार्यालय के सामने तीव्र आंदोलन किया जाएगा ऐसी चेतावनी दी गई है.

उक्त समस्याओं के संदर्भ में वरिष्ठों के साथ चर्चा कर शीघ्र ही समाधान निकाले जाने का आश्वासन अधिकारी ने दिया है. इस समय चंद्रपुर, गडचिरोली जिले के सुरक्षारक्षक कामगार बड़ी संख्या में उपस्थित थे.