कोयला उद्योग में दूसरे दिन भी जारी है हडताल, करोडो का हुआ नुकसान

चंद्रपुर. कोयला उद्योग में निजीकरण के खिलाफ वेकोलि की पांचों यूनियन की ओर से घोषित तीन दिवसीय हडताल के दूसरे दिन आज वेकोलि के चंद्रपुर, माजरी, बल्लारपुर, वणी और वणी नार्थ क्षेत्र की सभी कोयला खानों से उत्पादन और कोल ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह से ठप रहा. जिससे वेकोलि को करोडों का नुकसान हो रहा है. इसकी वजह से सभी क्षेत्रों में सन्नाटा छाया है.

कोयला उद्योग के निजीकरण की ओर ले जा रहे कमर्शियल माइनिंग के विरोध में वेकोलि में कार्यरत पांचों श्रमिक संगठनाओं ने एक साथ 3 दिवसीय हडताल शुरु की है. जिसका आज दूसरा दिन है.

माजरी सयुंक्त संघ मोर्चा के पांचों श्रम संघटन के पदाधिकारियों ने माजरी क्षेत्र में आज दूसरे दिन भी हडताल जारी रखी है. पांचों संगठन के साथ कामगारों का भी साथ मिल रहा है. आज दूसरे दिन भी कामगार अपने घरों से ही ड्यूटी के लिये नहीं निकले. सयुंक्त संघ अपनी मांगों को लेकर कर अड़े है. कोयला उद्योग के कमर्शियल माइनिंग बंद करो, सी.आई.एल. एवं एस.सी.सी.एल. के निजीकरण पर रोक लगाओ, सी.एम.पी.डी.आई.एल. को कोल इंडिया से अलग करने का आदेश वापस लिया जाए., सी.आई.एल. एवं एस.सी.सी.सी.एल. के ठेका मजदूरों की मजदूरी एवं अन्य सुविधा हाई पावर कमेटी की अनुशंसा के अनुसार लागू किया जाए तथा अन्य मांगो को लेकर हड़ताल अब भी जारी है. भारत सरकार ने श्रम संघ द्वारा दिए गए सुझाव को दरकिनार करते हुए एवं मजदूरों से किए गए वादों को तोड़ते हुए भारत सरकार ने 18 जून को कोयला खदानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया. केंद्र सरकार के इस कोयला उद्योग के निजी करण नीतियों के खिलाफ कोयला मजदूरों ने काफी मात्रा में आक्रोश है. इसी कारण केंद्रीय श्रम संगठन के इंटक, आयटक, एच एम एस, बी एम एस, सीटू, द्वारा समस्त कोयला आंचल में तीन दिन के लिए कमर्शियल माइनिंग के विरोध में देशव्यापी हड़ताल जारी है।

 इसमें बी.एम.एस. के पदाधिकारी मोरेश्वर अवारी, विवेक पालके, सतीश कुडुदुला, इंटक के धनंजय गुंडावार, एटक के  बंडू उपरे, दीपक डोके, एच.एम.एस के सुनिल श्रीवास्तव, दत्ताकोम्बे,सीटू  के जगलाल ,राजेंद्र गेडाम शामिल हुए.

वेकोलि बल्लारपुर क्षेत्र अंतर्गत पांचों यूनियन के साथ श्रमिकों ने भी कोल इंडिया में निजीकरण का विरोध किया है. इसकी खिलाफत करते हुए तीन दिवसीय देशव्यापी हडताल की घोषणा की है. इससे बल्लारपुर क्षेत्र अंतर्गत आने वाली सभी 8 कोयला खानों में उत्पादन ठप रहा. हडताल से कोयला उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है. कोल इंडिया की ओर से केंद्र सरकार को प्रतिवर्ष हजारों कारोड रुपए दिए जाते है. इसलिए कोल इंडिया के निजीकरण का सवाल ही नहीं है. एक वरष्ठि अधिकारी ने कहा कि सरकार के मनसुंबे समझ में नहीं आ रहे है. आंदोलन में बीएमएस के केंद्रीय महामंत्री सुधीर घुरडे, शांताराम वांढरे, इंटक के आर. शंकरदास, सुदर्शन डोहे, आयटक के नंदकिशोर म्हस्के, मधुकर ठाकरे, एचएमएय के अशोक चिवंडे, ताज मोहम्मद और सीटू के गणपत कुडे, शेख जाहिद के साथ अनेक पदाधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे. इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी आंदोलन किया गया.