खुन की कमी से हुई बाघिन की मृत्यु, डोनी जंगल में हुई घटना से वनविभाग बेचैन

    मूल. जंगल में विशेष निरिक्षण करते समय वनविभाग के क्षेत्रिय कर्मचारीयों को मूल तहसील के डोनी जंगल में झाडी में बाघिन मृतावस्था में पाए जाने से वनविभाग अधिकारी व कर्मचारीयों में बेचैन फैली है. 

    चंद्रपुर ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के अंतर्गत आनेवाले बफर क्षेत्र के वनपरिक्षेत्र मूल अंतर्गत जानाला उपक्षेत्र के डोणी नियतक्षेत्र के डोणी गांव से डेढ किमी की दूरी पर कंपार्टमेंट क्रमांक 327 में एक घने झाडी में पूर्ण विकसित एक बाघिन वनकर्मियों को बैठी दिखाई दी. काफी समय होने के बाद भी बाघिन की किसी भी तरह की हलचल दिखाई नही दी.

    जिसके कारण पिछले 4 दिनों से वन अधिकारी व कर्मचारी बाघिन पर नजर रखे हुए थे. 4 दिन लौटने के बाद भी बाघिन झाडी के बाहर नही आने से तथा सोयी हुई दिखाई देने से वनकर्मचारीयेां को संदेह हुआ व बाघिन को जगाने पर पूरे प्रयास किए. परंतु बाघिन ने किसी भी तरह का प्रतिसाद नही देने से नजदिक जाकर देखने पर बाघिन मृतावस्था में दिखाई दी.

    जंगल में बाघिन मृतावस्था में होने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारीयेां को देने पर वरिष्ठ अधिकारीयों ने घटनास्थल पहुचकर मुआयना किया. राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण द्वारा दी गई अनुमती के अधार पर मृत बाघिन को चंद्रपुर के प्राथमिक उपचार केंद्र ले जाया गया. जहां उसका पोस्टमार्टम किया गया. तत्पश्चात परिसर में मृत बाघिन पर अंतिम संस्का किया गया. पशु वैद्यकीय के पोस्टमार्टम के अनुसार बाघिन की मृत्यु उसे हुई जखम तथा अधिक रक्तस्त्राव के चलते शरीर में खुन की मात्रा कम होने से हुई है. 

    पांच दिन पहले इसी जंगल परिसर में दो बाघों के संघर्ष की घटना हुई थी. यह मृत बाघिन उनमें से ही एक होने की संभावना वनकर्मियों द्वारा जतायी जा रही है. परंत वरिष्ठ अधिकारीयेां ने फिलहाल मृत बाघिन के बारे में किसी भी प्रकार की अधिकृत जानकारी नही दी है. इसी परिसर में दो दिन पहले बाघों के संघर्ष में जखमी हुए बाघ पर उपचार करने गए वनकर्मचारीयों के टिम पर एक बाघ ने हमला करने से पशु वैद्यकीय अधिकारी गंभीर जखमी हुए थे.