आज छठव्रतियों ने किया खरना का पालन

भद्रावती तहसील के वेकोलि माजरी क्षेत्र में उत्तर भारतीयों द्वारा मनाये जाने वाला छठ पर्व की शुरुआत हो चूंकि है।

  • कोरोना के नियमों का पालन करने के निर्देश

माजरी. भद्रावती तहसील के वेकोलि माजरी क्षेत्र में उत्तर भारतीयों द्वारा मनाये जाने वाला छठ पर्व की शुरुआत हो चूंकि है। यहा पर वेकोलि खदान होने की वजह से उत्तर भारतीयों की संख्या अधिक है इसलिए यहा पर छठ पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण प्रशासन द्वारा छठ पर्व मनाने वाले भक्तों को इस बीमारी से बचाव के लिए संदेश भी दिये गये है। बुधवार को नहाय खाय से शुरु हुए छठव्रतियों ने आज गुरुवार को खरना का पालन किया। शुक्रवार को डूबते सूर्य और शनिवार को उगते सूर्य को अर्ध्य के साथ ही छठ का व्रत पूरा होगा।

कोरोना के मद्देनजर दिशा निर्देश जारी

जिसमें मास्क, सैनेटाइजर और अन्य निर्देश का पालन करना जरूरी होगा। सोशल डिस्टन्सिंग का भी पालन करना होगा तथा ग्रामपंचायत द्वारा माजरी परिसर में ऑटो पर लाऊड स्पीकर से घुमा कर प्रशासन द्वारा दिये गए नियमों का पालन करने की सूचना दी जा रही है। धारा 144 लागू होने के कारण नदी के घाट पर भीड़ नही करने की चेतावनी भी दी गई है। छठव्रतियों और उनके परिजनों को सरकारी नियम पालन करने की अपील और जनजागृति ग्रामपंचायत द्वारा समय -समय पर दिया जा रहा है। 

घरों को किया गया शुध्द

इस छठपर्व मे सूर्य की उपासना का महापर्व छठ बुधवार के नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। छठ व्रतियों ने जहां पवित्र स्नान के बाद घरों की शुद्धि की वहीं सात्विक भोजन कद्दू भात का भोग ग्रहण कर अपने तन व मन को शुद्ध कर व्रत का संकल्प लिया। इसके बाद अब गुरुवार को खरना का पालन किया गया। उधर, छठ घाटों को सजाने संवारने का काम पूरा हो गया है नहाय खाय का पालन किया गया। छठ व्रत करने वाले सुबह घाटों पर जाकर पवित्र स्नान करने के बाद वहां से जल लेकर घर पहुंची। इसी जल से घरों के बर्तनों आदि की धुलाई की गई। कुछ घरों में गंगा जल का छिड़काव कर शुद्ध किया गया। इसके बाद कद्दू भात तैयार किया गया। खुद इसका सेवन करने के साथ साथ व्रत में शामिल होने वालों को भी इसका सेवन कराया।

छठव्रतियों ने किया खरना का पालन

छठ पूजा में ठेकुआ का खास महत्व होता है। इसके लिए गेहूं सुखाने के साथ साथ इसे पीसने का काम भी किया जा रहा है। प्रसाद चढ़ाने के लिए कुछ छठव्रती अपने घरों में ही जांत से गेहूं की पिसाई कर रही हैं। वहीं, शहर के कुछ इलाके में प्रसाद के लिए गेहूं की पिसाई के लिए आटा चक्की को भी खास तौर पर साफ सुथरा किया गया गुरुवार को खरना पूजा हुआ। व्रती गुड़ व दूध से बने खीर का सेवन कर खरना का पालन करेंगी। परिवार के लोगों के साथ साथ पास पड़ोस के लोग व रिश्तेदारों के बीच भी यह प्रसाद बांटा जाएगा। शुक्रवार की शाम को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया जाएगा।

सप्तमी को होगा छठ व्रत का समापन

षष्ठी के दिन व्रती दिन भर उपवास रहकर शाम को छठ घाट पहुंचते हैं और जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को पहला अर्ध्य दिया जाता है। सप्तमी के दिन व्रती सूर्योंदय से पूर्व छठ घाट में पहुंचकर जल में खड़े हो जाते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के बाद हवन होता है। हवन के बाद इस महापर्व का समापन होगा।

सज-धज कर तैयार है शिरना, वर्धा नदी

छठ मइया का पर्व शुरू होते ही माजरी शहर के शिरना नदी के घाटों की सजावट की जा रही है। ग्राम पंचायत के कर्मचारियों और छठ पूजा समिति के सदस्यों ने घाटों की सफाई की है। इसके अलावा घाट पर जाने वाले रास्ते, मार्ग में लाइट भी लगाए गए हैं। छठ घाटों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस व यातायात जवानों को भी तैनात किया जाएगा।

क्यों नारी रूप में पूजे जाते हैं सूर्यदेव

सूर्य को षष्ठी तिथि के दिन मईया अर्थात देवी के रूप में पूजा करने कर परंपरा है। इस बारे में मान्यता है कि किसी समय परशुराम के पिता जमदग्नी ऋषि जंगल में भ्रमण कर रहे थे। उस समय सूर्य की तपन तेज थी। उसी दौरान परशुराम की मां रेणुका तुलसी चबूतरा में पूजा कर रही थी। वह पसीने से लथपथ थी। यह देखकर जमदगनी ऋषि को सूर्य पर क्रोध आ गया। उन्होंने सूर्य को श्राप देते हुए कहा कि तुम भी एक दिन के लिए स्त्री बन कर पूजे जाओगे, तब तुम्हे स्त्रियों का कष्ट समझ में आएगा। तभी से ऐसी मान्यता है कि सूर्य उस दिन छठ मईया के रूप में पूजे जाते है। शेष दिवस वे सूर्य देव के रूप में पूजे जाते हैं।