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    • जिले में 100 से अधिक बाघों का निवास

    चंद्रपुर. वनविभाग की ओर से भद्रावती तहसील के चोरा तिरवंजा और राजुरा जोगापुर जंगल सफारी की शुरुवात की गई. आज सुबह चोरा तिरवंजा और 20 फरवरी की शाम 5.15 बजे जोगापुर में पर्यटकों को बाघ के दर्शन होने से भविष्य में दोनों जंगल सफारी को ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प की भांति ही लोकप्रियता मिलने की प्रबल संभावना है. इससे परिसर के बेरोजगारों को रोजगार के अवसर बढेंगे.

    आज रविवार की सुबह भद्रावती तहसील के चोरा तिरंवजा प्रवेश द्वार से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पर्यटकों को एक बाघ मार्ग पार करते हुए दिखाई दिया. चोरा तिरवंजा में 19 फरवरी को विधायक प्रतिभा धानोरकर के हाथों जंगल सफारी का उद्घाटन किया गया. उन्होंने भी जंगल सफारी से भ्रमण किया. आज सुबह के समय पर प्रवेश द्वार के पास ही बाघ दिखाई देना पर्यटकों के लिए हर्ष की बात है. भद्रावती तहसील की सीमा ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प से सटी है. 

    राजुरा जोगापुर में 20 फरवरी से जंगल सफारी की शुरुवात की गई. प्रथम पर्यटक के रुप में राजुरा नगर पालिका के जूनियर इंजीनियर रवि जामुनकर अपने परिवार के 9 सदस्यों के साथ दो जिप्सी से भ्रमण किया. शाम 5 बजे उन्हे कक्ष क्र 176  नीला तालाब, सिर्सी टेंबुरवाही तालाब के पास एक बाघ दिखाई दिया. पहले पर्यटक के रुप में भ्रमण करने गए पर्यटकों ने बाघ को देखकर उनके मन की मुराद पूरी हो गई. क्योंकि जंगल के राजा इस प्रकार स्वच्छंद विचरण करते देखने की आस में देश ही विदेशी के पर्यटक चंद्रपुर खींचे चले आते है.

    राजुरा जोगापुर भ्रमण के पश्चात शाम को प्रवेश द्वार से निकलने पर प्रथम पर्यटक के रुप में उनका और परिवार का वनविभाग की ओर से पौधा देकर सत्कार किया गया. इस अवसर पर वनपरिक्षेत्र अधिकारी विदेश कुमार गलगट, क्षेत्र सहायक नरेंद्र देशकर, जीवन कावले, अशोक गिरसावले, संदीप कमलापुरवार, सैयद नईम आदि प्रमुखता से उपस्थित थे.

    चंद्रपुर जिले में स्थित ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प में 100 से अधिक टाईगर होने से देश ही नहीं दुनिया भर के पर्यटक ताडोबा में बाघों को देखने के लिए खींचे चले आते है. किंतु ताडोबा के प्रवेश द्वारों से सीमित वाहनों को प्रवेश दिया जाता है. इसकी वजह से अनेक पर्यटकों को निराशा होती है.

    अनेकों बार प्राग्रोम बनाने के बाद भी लोगों को समय पर आनलाईन बुकिंग न होने से उन्हे कार्यक्रम रद्द करना पड़ता है. किंतु अब जिले में ताडोबा के अलावा 26 जनवरी को शुरु किया गया जुनोना, इसके अलावा पिछले दो दिनों में शुरु किए राजुरा और भद्रावती के पर्यटकों को बाघ दिखाई देने से पर्यटकों के मन की मुराद पूरी हो गई है.

    घने जंगल में बाघ, तेंदुआ समेत अनेक जानवरों का निवास

    राजुरा जोगापुर घने जंगल में बाघ, तेंदुएं, जंगली भैंसा, भालू, जंगली बिल्ली, हिरण, चीतल, सांबर, नीलगाय, बारासिंघा, जंगली कुत्ते, नेवला, जंगली सुअर जैसे प्राणी है. खडकी तालाब, बोर तालाब, पिपरबोडी, सिंगागुफा, पीला पानी, बाबापुर मंदिर, सिंचाई तालाब, धावडाबोडी, वाच टावर, खिरनी तालाब, दौडा तालाब, इमली गुफा, गोमती पुल, जोगापुर मंदिर, वाघनाला, नीला तालाब, लाल तालाब, कासला गोटा आदि अनेक प्रकार के पेड, 250 प्राजाति के पक्षी और रंग बिरंगी तितलियों परिसर में पाई जाती है. परिसर के 28 पर्यटक स्थान यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेंगे.