वनस्पति से बनाया चांदी के नैनो पार्टीकल्स- विदर्भ के संशोधकों को मिली सफलता

  • यू.एस.ए. मटेरियल टुडे मासिक ने प्रकाशित किया डा. नांदे का साक्षात्कार

बल्लारपुर. वैद्यकीय सौंदर्य प्रसाधन और औद्योगिक प्रयोग के लिए वनस्पतियों के अर्क से चांदी के नैनो पार्टीकल्स बनाने का आसान और पर्यावरण पूरक अनुकुल तरीका विदर्भ के संशोधकों ने खोज निकाला है. इस संशोधन की दखल एल्स्तव्हेयर के (यू.एस.ए.) मटेरियल टुडे मासिक ने ली है. संशोधनकर्ताओं में गुरुनानक साईंस कालेज बल्लारपुर के डा. अमोल नांदे, सरदार पटेल कालेज चंद्रपुर की डा. उर्वशी मानिक, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विवि नागपुर के डा. संजय ढोबले और रा.तु.म.ना. विवि नागपुर की डा. स्वाती राऊत (नांदे) विदर्भवासियों का समावेश है.

यह सल्विर नैनो पार्टीकल्स वैसे काफी वर्षो से दवाईयों में प्रतिजैविक एजंट, दवा वितरण प्रणाली और कैंसर उपचार में केमिकल के द्वारा प्रयोग की जाती थी. किंतुय ह शरीर को घातक होने का डर बना था. सौंदर्य प्रसाधन में भी इसका प्रयोग होता था किंतु रासायनिक तत्व के आधार पर, किंतु अब संशोधकों द्वारा नैसर्गिक वनस्पति के अर्क से चांदी के नैनो पार्टीकल्स तैयार करने से उपचार लेने वाले सौंदर्य प्रसाधन वस्तू का उपयोग करने वालों को किसी प्रकार की शारीरिक क्षति नहीं होगी.

इस संबंध में जानकारी देते हुए डा. अमोल नांदे ने कहा कि इस संशोधन को एक से डेढ वर्ष का समय लगा है. इसके लिए एसपी कालेज चंद्रपुर, नागपुर विवि और कोचीन के प्रयोगशाला का प्रयोग किया गया. कटहल और नीम की पत्तियों को उबालकर और छानने के बाद अर्क को चांदी के नायट्रेट द्रव में मिलाया जाता है. यह मश्रिण पुनर्‍ गर्म कर चांदी के नैनो पार्टीकल्स रुप में एकत्र किए जाते है. संशोधन के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग किया गया विशेष बात है कि यह रसायन गैरविषैला है. कम समय और सस्ते में पार्टीकल्स तैयार होता है जो स्वास्थ्य के लिए पोषक है. उन्होंने आगे बताया कि चंद्रपुर-गडचिरोली जिले वनवैभव, वनसंपदा से भरे पडे है. इस क्षेत्र में शासन संशोधकों को प्रेरित करें तो आयुर्वेद क्षेत्र में बडी क्रांति हो सकती है. इस संशोधन के संबंध में जून 2020 के मटेरियल टुडे मासिक ने डा. नांदे का साक्षात्कार प्रकाशित किया गया है. सभी संशोधक का अभिनंदन किया जा रहा है.