Naglok is in India, more than 70 species of snakes are inhabited

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता हैं। आज नागपंचमी है और कई लोग इस चक्कर में सांपों को दूध पिलाने निकल पड़ते हैं। उज्जैन के सर्प अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर मुकेश इंगले ने बताया कि सांपों को दूध नहीं पिलाना चाहिए इससे वह मर जाते हैं। सांप मांसाहारी जीव है दूध पचा नहीं पाते और निमोनिया का शिकार हो जाते है।

मुकेश इंगले का परिवार पांच पीढ़ियों से सांप के संरक्षण सहित उन पर रिसर्च कर रहा हैं। उन्होंने बताया, दुनियाभर में सांपों की 3000 से अधिक प्रजातियां हैं। भारत में करीब 320 सांप हैं जिनमें से करीब 60 ऐसे सांप हैं, जिनके डसने पर इंसान मर जाता है। 

वहीं भारत में एक प्रदेश ऐसा भी है जहां नागलोक होने की बात कही जाती हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में जशपुर जिले को नागलोक के नाम से जाना जाता है। जशपुर देश की एकलौती ऐसी जगह है जहां कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांपों का बसेरा है। गर्मियों और बारिश में यह जगह पूरी तरह सांपों से घिर जाता है। जशपुर में कई प्रकार के जहरीले सांपों की प्रजातियां पाई जाती है। यहां इन जहरीले सांपों की वजह से हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है। 

छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर जशपुर जिले के ऐसे गांव जहां पर आदिवासियों का बसेरा हैं। यहां बारिश होते ही सांपों का जोड़ा विचरण करने लगता है। गर्मी में तपती जमीन से परेशान होकर और बारिश में बिल में पानी भर जाने से सांप बाहर दिखने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जगह और यहां का वातावरण सांपों के लिए अनुकूल है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं।

कश्यप ऋषि और कद्रू से नागों का जन्म-
नाग की उत्पत्ति के संबंध में महाभारत की एक कथा के अनुसार ऋषि कश्यप और दक्ष पुत्री कद्रु से नागों का जन्म हुआ है। कद्रू और कश्यप से एक हजार नाग प्रजातियों का जन्म हुआ था। इनमें से आठ नाग प्रमुख थे। वासुकि, तक्षक, कुलक, कर्कोटक, पद्म, शंख, चूड़, महापद्म और धनंजय। नागों की ये आठ मूल प्रजातियां थीं।