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नई दिल्ली: देश की सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया (Air India) 60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज के तले दबी हुई है. घाटे में चल रही इस कंपनी को बचाने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने बेचने का फैसला लिया है. जिसके लिए आज बोली बुलाई गई थी. एयर इंडिया को बचाने के लिए अब उसके कर्मचारी ही मैदान में उतर गए हैं. कंपनियों के पूर्व कर्मचारीयों (Former Employees) ने एक अमेरिकी फर्म इंटरअप्स (Interups) के साथ मिलकर 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बोली लगाई है.

एक एक लाख रुपए करेंगे जमा

मिली जानकारी के अनुसार कंपनी के 200 से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारी एयर इंडिया को बचने के लिए शुरू की गई मुहिम में लगे हुए हैं. वह हर कर्मचारियों से एक एक लाख रुपए इकठ्ठा करने में लगे हुए है. अगर सब सही रहा तो यह देश के इतिहास में पहला होगा जब कर्मचारियों ने अपनी कंपनी को खरी देंगे. ज्ञात हो कि एयर इंडिया में 14 हजार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं.

बोली की आज आख़िरी दिन

केंद्र सरकार द्वारा बोली लगाने के लिए आज आख़िरी दिन था. पिछले कई दोनों से ख़बर चल रही थी टाटा, अडानी और हिंदुजा बोली लगा सकती है, लेकिन इन कंपनियों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि सरकार ने बोली लगाने वाले कंपनियों के नाम घोषित करने की तारिक को बढ़ाकर 5 जनवरी कर दी है.

पूर्ण हिस्सेदारी बेचेंगी सरकार

केंद्र सरकार ने घाटे में चल रही एयर इंडिया को बचाने के लिए पूर्ण निजीकरण ही एक रास्ता बताया है. इसी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी 100 प्रतिशत भी सरकार बेचेंगी। कंपनी पर अभी 60,074 करोड़ रुपये अर्ज है. इसमें से इसके खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपये वहन करने होंगे, जबकि बाकी कर्ज को विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए एअर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया जाएगा.