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    नयी दिल्ली. कभी भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता रहे किरण मोरे (Kiran More) ने अब महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) के भारतीय टीम में चुने जाने से जुड़ा एक बड़ा ही बेहतरीन और मजेदार किस्सा साझा किया है। विदित हो कि मोरे जब भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सिलेक्टर (More as Chief Selector) थे, तभी धोनी भारतीय टीम में आए थे।

    दरअसल मोरे (More) ने बताया कि उन्होंने तन भारतीय टीम के कप्तान और मौजूदा BCCI प्रेजिडेंट सौरभ गांगुली (Sourav Ganguly) को काफी मनाना पड़ा था कि वह 2003-04 के दलीप ट्रोफी फाइनल में नॉर्थ जोन के खिलाफ धोनी को विकेटकीपिंग करने का एक मौका जरुर दें। मोरे चाहते थे कि पूर्व क्षेत्र के नियमित विकेटकीपर दीप दासगुप्ता (Deep Dasgupta) के स्थान पर धोनी को यह जिम्मेदारी दी जाए।

    दरअसल मोरे (More) का इसके पीछे ख्याल था कि भारतीय टीम (Indian Cricket Team) को अब एक ऐसे विकेटकीपर बल्लेबाज की बेहद जरूरत थी जो विकेटकीपर होने के साथ मिडल ऑर्डर में आकर तेजी से रन बना सके। राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) को बतौर विकेटकीपर उतारने का अनुभव तब तक काफी लंबा खिंच चुका था। इसी समय मोरे को महेंद्र सिंह धोनी (M.S Dhoni) नजर आए जो घरेलू क्रिकेट में पहले से काफी काफी रन बना रहे थे।

    मोरे ने इस पर बताया कि, “हम एक ऐसे ही विकेटकीपर बल्लेबाज की तलाश कर रहे थे। उस समय खेल का फॉर्मेट भी थोड़ा बदल रहा था और हमें अब एक पावर हिटर की जरूरत थी। एक ऐसा बल्लेबाज जो नंबर छ या सात पर उतरे और तेजी से 40-50 रन भी बना दे। तब तक राहुल द्रविड़ बतौर विकेटकीपर 75 वनडे इंटरनैशनल खले चुके थे। वह 2003 का वर्ल्ड कप भी खेल चुके थे। तो हमें अब एक विकेटकीपर की सख्त जरूरत थी।”

    मोरे ने करिश्मा कोटक और कर्टली ऐम्ब्रोस के एक शो में कहा कि इसके लिए उन्हें तब वर्तमान भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरव गांगुली और दासगुप्ता को मनाने में 10 दिन लगे थे कि वह उस साल नॉर्थ जोन के खिलाफ फाइनल में भी धोनी को ही विकेटकीपिंग करने दें। मोरे ने कहा, ” जब मेरे साथियों ने पहली बार देखा, तो मैं भी उन्हें देखने गया। मैं खास तौर पर वहां गया था। मैंने देखा कि टीम के 170 के स्कोर में से 130 रन तो अकेले उन्होंने बनाए। उन्होंने सबकी गेंदबाजी पर कमाल के शॉट खेले। हम चाहते थे कि वह फाइनल में बतौर विकेटकीपर खेलें। तब हमारी सौरभ गांगुली और दीप दासगुप्ता से काफी चर्चा हुई। तो गांगुली और उनके सिलेक्टर को मनाने में 10 दिन लगे कि वह दासगुप्ता से कहें कि वह कीपिंग न करें और धोनी को विकेटकीपिंग का यह सुनहरा मौका मिले।’

    इतना ही नहीं धोनी ने उस मैच में भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज शिव सुंदर दास के साथ पारी की शुरुआत भी की। उन्होंने पहली पारी में 21 रन बनाए और दूसरी पारी में 47 गेंद पर 60 रन ठोके। नॉर्थ जोन की टीम में आशीष नेहरा, अमित भंडारी, सरनदीप सिंह और गगनदीप सिंह जैसे गेंदबाज थे। इसके फौरन बाद ही धोनी को केन्या दौरे पर भारत एक टीम में चुना गया। वहां वह भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। और इस सीरीज के बाद ही भारतीय टीम में उनका चयन हो गया।

    मोरे ने कहा, “महेंद्र सिंह धोनी ने कमाल की विकेटकीपिंग की। उन्होंने सभी गेंदबाजों पर शॉट लगाए और फिर वह केन्या दौरे पर गए। यहां ट्राएंगुलर सीरीज में भारत ए, पाकिस्तान ए और केन्या के बीच मुकाबले हुए। उन्होंने यहाँ करीब ताबड़तोड़ 600 रन बनाए और उसके बाद जो हुआ वह अब क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा है। तो आपको ऐसे जबरदस्त और टैलेंटेड क्रिकेटर को मौका दोना पड़ता है जिसमें कुछ बेहतरीन और खास हो। वह जो एक मैच-विनर नजर आता हो। धोनी में ये सभी खूबियां विधमान थीं। यह बस एक वक्त की बात थी कि सभी एक साथ क्लिक हो जाएं। हमने सही और बेहतरीन घोड़े पर दांव लगाया और यह हमारे लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ। मैं सिलेक्शन कमिटी के सभी सदस्यों को भी ऐसे नायाब हीरे को ढूंढ़ने काश्रेय दूंगा।”