वायरस संकट के दौरान रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को बेहतर बनाये रखा: सुब्बाराव

नयी दिल्ली: रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव (D. Subbarao) ने बुधवार को कहा कि संकट के समय वित्तीय व्यवस्था (Economy Condition) को बेहतर बनाये रखना काफी मुश्किल काम होता है और रिजर्व बैंक ने कोविड- 19 (Covid-19) संकट के समय अर्थव्यवस्था (Economy) की वित्तीय स्थिरता को बनाये रखने का काम सफलतापूर्वक किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (Confederation of Indian Industry) (सीआईआई) द्वारा वीडियो कन्फ्रेंसिंग के जरिये आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुये सब्बाराव ने रिजर्व बैंक के कदमों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इस दौरान रिजर्व बैंक ने जितने भी कदम उठाये उनका उद्देश्य वित्तीय स्थिरता हासिल करने के साथ ही वित्तीय संकट को रोकना पर केन्द्रित रहे। इसके साथ ही केन्द्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में धन पहुंचाने पर भी गौर किया। उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी संकट को व्यवस्थित करना काफी मुश्किल होता है, लेकिन रिजर्व बैंक कोविउ- 19 संकट के दौरान अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को बनाये रखने में सफल रहा है।”

सुब्बाराव ने इस बात पर गौर किया कि वर्तमान में दुनिया की सरकारें और केन्द्रीय बैंक वर्ष 2008- 09 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान किये गये उपायों को ही अमल में ला रहे हें जबकि मौजूदा कोरोना वायरस संकट अलग है। उन्होंने कहा, ‘‘जहां वैश्विक वित्तीय संकट संपत्ति के कारण पैदा हुआ संकट था जिसने वित्तीय क्षेत्र को सबसे पहले प्रभावित किया वहीं कोरोना वायरस संकट ने सबसे पहले अर्थव्यवस्था के वास्तविक क्षेत्र को प्रभावित किया।”

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा कि जहां तक रिजर्व बैंक की बात है उसकी मौद्रिक नीति पहल के कुछ खास पहलू रहे हैं। ‘‘सबसे पहला खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के जरिये अतिरिक्त तरलता को आर्थिक तंत्र में डाला गया। नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर), सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में कटौती की गई।

दूसरा नीतिगत दरों, रिवर्स रेपो दर को कम कर वित्तीय बाजार में तनाव कम किया गया और कुछ खास क्षेत्राों के लिये लक्षित दीर्घकालिक रेपो दर पर परिचालन किया गया। ” उन्होंने कहा, ‘‘तीसरा कदम जो उठाया गया उसमें किस्त जमा करने की मोहलत और उसका विस्तार करना रहा। यह काम नियमन के तहत किया गया।”

सुब्बाराव ने हालांकि यह भी कहा कि आर्थिक तंत्र में जो अतिरिक्त तरलता पहुंच चुकी है आने वाले समय में उसके प्रवाह को शिथिल करना चुनौती हो सकती है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार का राजकोषीय घाटा बजट में अनुमानित राजकोषीय लक्ष्य के मुकाबले दुगुना हो सकता है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि राजकोषीय विस्तार की नीति इस समय जरूरी है। सरकार की तरफ से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जाना वाला खर्च अर्थव्यवस्था के लिये फायदेमंद होगा।(एजेंसी)