लौह पुरुष को नहीं छोड़ा कंपनी ने ईमान तोड़ा गबन से नाता जोड़ा

लौह पुरुष कहलाने वाले देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) के महान आदर्शों से प्रेरणा लेना तो दूर रहा, उनकी विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’  (Statue of Unity) की टिकटों की बिक्री करने वाली एजेंसी ने 5.4 करोड़ रुपए की मोटी रकम का गबन कर लिया। यह कितना बड़ा विश्वासघात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi)के प्रयासों से इस प्रतिमा का निर्माण गुजरात के नर्मदा जिले में किया गया जो ऊंचाई में अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी बताई जाती है। अक्टूबर 2018 में उद्घाटन के बाद से यह देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रबंधन ने करीब डेढ़ वर्षों में यह रकम जमा की। नकदी रकम एकत्र करने वाली एजेंसी को यह राशि सौंपी गई थी। इस कलेक्शन एजेंसी की नियुक्ति वडोदरा स्थित एक निजी बैंक ने की थी। पुलिस के अनुसार एजेंसी के कर्मचारियों ने 5,24,77,375 रुपए की यह नकद राशि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्राधिकरण के खाते में जमा नहीं की। निजी बैंक के प्रबंधक ने केवडिया पुलिस थाने में नकदी जमा करने वाली एजेंसी के साथ-साथ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। गबन करने वाले जब धार्मिक संस्थानों की रकम पर हाथ साफ कर देते हैं तो उन्हें सरदार पटेल के स्मारक से कौन सा परहेज! बेईमानों की नीयत में खोट होता है। इस मामले का स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। एक अधिकारी के मुताबिक यह निजी बैंक और नकद रकम एकत्र करने वाली एजेंसी के बीच का मामला है। यूरोप के एकीकरण का जो काम बिस्मार्क ने किया था उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण भूमिका सरदार पटेल ने निभाई थी। उन्होंने अपनी सूझबूझ, दृढ़ता और दबाव से देश की 650 से अधिक रियासतों या रजवाड़ों का भारतीय संघ में विलीनीकरण किया। इस तरह भारत का एकीकरण करने का महान कार्य उन्होंने किया।

हैदराबाद का निजाम अपने इलाके को स्वतंत्र रखना या पाकिस्तान में शामिल होना चाहता था। निजाम उस्मान अली खान के उकसाने पर हैदराबाद में रजाकार लूटपाट, आगजनी व खून-खराबा कर रहे थे। तब सरदार पटेल ने फौज भेजकर निजाम को घुटने टेकने पर मजबूर किया। रजाकारों का मुखिया कासिम रिजवी नजरबंद कर लिया गया। जूनागढ़ के नवाब को भी पाकिस्तान भागना पड़ा। यदि सरदार नहीं होते तो राष्ट्र का यह एकात्मक स्वरूप नहीं होता। ऐसी महान विभूति के स्मारक की टिकटों की राशि का गबन अत्यंत निंदनीय है। हाल ही में वहां ‘सी प्लेन’ सुविधा रद्द होने की बात भी सामने आई थी। अब वहां की व्यवस्था पूरी तरह सुधारी जाए।