40,000 complaints Corruption also in Corona

कितनी शर्म की बात है कि कोरोना संकट में भी भ्रष्टाचारी अपनी करतूतों से बाज नहीं आए.

कितनी शर्म की बात है कि कोरोना संकट में भी भ्रष्टाचारी अपनी करतूतों से बाज नहीं आए. यह ऐसा समय है कि इंसानियत के नाते तत्परता से सहयोग करने और सेवा प्रदान करने की भावना होनी चाहिए लेकिन जिसकी प्रवृत्ति ही भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी की हो, उससे क्या उम्मीद की जा सकती है! एक ओर तो कितने ही स्वास्थ्यकर्मियों व पुलिस ने जान जोखिम में डालकर लॉकडाउन के दौरान अपनी सेवाएं दीं. वहीं दूसरी ओर ऐसे भी दुर्जन किस्म के लोग थे जिन्होंने इस कठिन परिस्थिति में भी अपना लालच नहीं छोड़ा और काली कमाई करते रहे. कोरोना के दौरान भी सरकारी अधिकारियों द्वारा धनराशि का गबन, रिश्वतखोरी व उत्पीड़न किया गया. इस संबंध में बहुत बड़ी तादाद में शिकायतें मिलीं. इसका मतलब यही हुआ कि मनमानी व अधिकारों का दुरुपयोग किया गया और लोगों की असहायता का गैरवाजिब फायदा उठाने में अधिकारी पीछे नहीं रहे. कोरोना आपदा के दौरान ज्यादातर शिकायतें वीजा की मंजूरी, विदेश में फंसे हुए भारतीयों को स्वदेश वापस लाना तथा आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता को लेकर थीं. इसके अलावा अस्पतालों में अपर्याप्त सुविधाएं, मरीज पर ध्यान नहीं दिया जाना, मनमानी फीस चार्ज करना और लाखों का बिल बनाना, पीएम केयर्स निधि के लिए इच्छुक व्यक्ति द्वारा दान करने में समस्या, लॉकडाउन में किसी भी व्यक्ति का फंस जाना तथा कोरोना से निपटने के लिए जारी एडवाइजरी या गाइडलाइन का पालन नहीं करना जैसी समस्याएं शिकायत के रूप में सामने आईं. यह वास्तव में चिंताजनक है कि केंद्र सरकार को भ्रष्टाचार की 40,000 शिकायतें मिली हैं. प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की वेबसाइट पर डाली गई 1,67,000 से अधिक शिकायतों में से लगभग 1,50,000 शिकायतों पर ध्यान दिया गया. इससे अफसरशाही का रवैया सामने आता है जो आपदा के समय सहयोग देना तो दूर रहा, मुसीबत में पड़े लोगों का शोषण करने से बाज नहीं आई. यह अत्यंत अमानवीय रवैया था. सरकार ने प्रशासनिक सुधार के उद्देश्य से 2015 में प्रगति (प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) लागू किया था जिसमें विभिन्न मंत्रालय शामिल हैं. प्रगति की 25 नवंबर को हुई बैठक में भ्रष्टाचार का मुद्दा सामने आया. स्वयं प्रधानमंत्री जानना चाहते थे कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार की कितनी शिकायतें मिली हैं और व्यक्ति, प्रक्रिया व नीति के तहत उस पर क्या कार्रवाई की गई.