Mamata banerjee

बिहार में चुनावी (Bihar election) जीत से बीजेपी के हौसले बुलंद हो गए हैं. अब उसकी अगली मंजिल बंगाल है. यह तो बीजेपी भी जानती है कि ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को चुनौती देना आसान नहीं है. ममता और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 3 दशकों से चले आ रहे लेफ्ट के शासन को उखाड़ फेंका था. यह काम बीजेपी या कांग्रेस (Congress) से नहीं हो पाया था. ममता बनर्जी ने सीपीएम के नेतृत्ववाली लेफ्ट पार्टियों से उन्हीं के तौर-तरीके से लड़ाई लड़ी थी. मोर्चा, धरना, नारेबाजी, सड़कों व फुटपाथ पर आकर विपक्षी कार्यकर्ताओं से भिड़ना तथा बूथ पर कब्जा करना! बंगाल में इसी तरह की हिंसक राजनीति रही है. वहां आखिरी कांग्रेस सरकार सिद्धार्थ शंकर राय (Siddharth shankar ray)की थी.

फिर ज्योति बसु के नेतृत्व में 30 वर्ष वामपंथियों की हुकूमत रही. ममता ने लेफ्ट का किला तोड़ने में सफलता पाई. बीजेपी ने तय कर लिया है कि अगले वर्ष के प्रारंभ में होनेवाले बंगाल विधानसभा चुनाव को किसी भी कीमत पर जीतना है. यही वजह है कि बिहार का चुनाव चलते समय ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल के दौरे पर चले गए थे. ममता के खिलाफ राज्यपाल जगदीश धनखड़ को इस्तेमाल किया जा रहा है. दोनों के बीच टकराव चलता रहता है. केंद्र के इशारे पर राज्यपाल कभी भी बंगाल में कानून व्यवस्था भंग हो जाने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की आवश्यकता को लेकर सिफारिश भेज सकते हैं. राज्यपाल ने कहा भी कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है. वहां के सरकारी अफसर राजनीतिक कार्यकर्ता बन गए हैं. विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है.

राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा वापस ली जा रही है. मैं नहीं चाहता कि बंगाल की जनता यह विश्वास खो दे कि बंगाल में निष्पक्ष चुनाव भी हो सकता है. जनता के हित में संविधान के हिसाब से कदम उठाए जाएंगे. बीजेपी ने ममता बनर्जी को सीएम पद से बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. बीजेपी को यह भी देखना होगा कि कहीं राष्ट्रपति शासन लगाने से ममता को सहानुभूति न मिल जाए. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी स्वयं चाहती हैं कि राज्य में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए ताकि चुनाव के दौरान सताई गई नेता का विक्टिम कार्ड खेल सकें. वह केंद्र सरकार को इसके लिए मजबूर कर रही हैं. तृणमूल कांग्रेस में माफिया और गुंडे हैं जो लोगों को डराने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं. जब तक यह सरकार रहेगी, राज्य में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो पाएंगे. बीजेपी नेताओं को पता है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद ही उनकी पार्टी बंगाल में जीत की उम्मीद कर सकती है. ममता के शासन में लेफ्ट पार्टियां बेहद कमजोर हो गईं. इसलिए बीजेपी को पनपने का मौका मिल गया. अब वह नए दांवपेंच से तृणमूल को पस्त करने की चाल चलेगी.