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लोकतंत्र में किसी भी एक व्यक्ति का किसी पद पर एकाधिकार नहीं होना चाहिए. बदल-बदलकर सुयोग्य लोगों को मौका दिया जाना ही उचित है. यदि एक ही व्यक्ति किसी पद को अपनी जागीर समझने लगा तो जनतंत्र कहां रहा?

लोकतंत्र में किसी भी एक व्यक्ति का किसी पद पर एकाधिकार नहीं होना चाहिए. बदल-बदलकर सुयोग्य लोगों को मौका दिया जाना ही उचित है. यदि एक ही व्यक्ति किसी पद को अपनी जागीर समझने लगा तो जनतंत्र कहां रहा? बीजेपी ने एक सख्त व साहसिक निर्णय लेते हुए राज्यसभा चुनाव में किसी पिछले राज्यसभा सांसद को रिपीट नहीं किया और दिग्गज नेताओं का टिकट काट दिया. इस बात की जरा भी परवाह नहीं की कि किसी को बुरा लगेगा या कोई रूठ जाएगा. कहीं कोई मुरव्वत नहीं की. राज्यसभा सदस्य पद पर 6 वर्ष काफी होते हैं. आखिर कोई कब तक कुंडली मारकर बैठा रहेगा? अन्य जनसेवी नेताओं को भी तो अवसर मिलना चाहिए. अधिकतर देखा जाता है कि विभिन्न पार्टियां अपने कुछ नेताओं को बार-बार लोकसभा और राज्यसभा प्रत्याशी बनाती हैं. यदि टर्म खत्म होने पर उम्मीदवार बदले जाएं तो नए उदीयमान और कर्मठ लोगों को मौका मिलेगा जो कि अब तक पीछे खड़े रहने के लिए मजबूर थे.
 
जनता को भी इससे अच्छा लगता है कि पार्टी अन्य नेताओं को उदारतापूर्वक अवसर दे रही है और उसके पास अच्छे, सुशिक्षित व कर्मठ नेता-कार्यकर्ताओं की कोई कमी नहीं है. बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी जिसमें से 9 नाम तो बीजेपी नेताओं के हैं जबकि 2 नाम एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं के हैं. महाराष्ट्र में बीजेपी कोटे से रामदास आठवले और अमर शंकर साबले राज्यसभा सदस्य हैं. बीजेपी ने इस बार आठवले को तो प्रत्याशी बनाया है लेकिन साबले का टिकट काट दिया है. साबले की जगह उदयनराजे भोसले को राज्यसभा में भेजने का फैसला किया है. बीजेपी ने तीसरी सीट के लिए डा. भागवत कराड को प्रत्याशी बनाया है. पार्टी ने झारखंड में अपने प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को राज्यसभा का टिकट दिया है. बीजेपी में अनुशासन अच्छा होने से दिग्गजों के टिकट काटना भी संभव हो पाता है. यह ऐसी पार्टी है जिसने बड़ी आसानी से अपने बड़े नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को सक्रिय राजनीति से हटाकर परामर्श मंडल में डाल दिया था. वह कोई भी सख्त फैसला बेहिचक ले सकती है.