चाहे देर से ही सही अब जागी महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार

अत्यंत घातक कोरोना वायरस के प्रति अब राज्य सरकार जागृत हुई है. महाराष्ट्र में हाईअलर्ट घोषित किया गया है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने समस्या की गंभीरता को देखते हुए विशेष बैठक की, जिसमें कोरोना वायरस

अत्यंत घातक कोरोना वायरस के प्रति अब राज्य सरकार जागृत हुई है. महाराष्ट्र में हाईअलर्ट घोषित किया गया है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने समस्या की गंभीरता को देखते हुए विशेष बैठक की, जिसमें कोरोना वायरस से फैले खतरे की समीक्षा की गई व जनजागृति पर जोर दिया गया. इस बैठक में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे सहित कई मंत्री तथा रेलवे, एयरपोर्ट, बंदरगाह, निजी अस्पताल सहित कई विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग से भीड़ वाली जगहों पर लोगों के जमा होने पर फैसला लेने के लिए स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने का निर्देश दिया. सिनेमाघर, सभागृह, स्कूल, कालेज, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट पर जनता की भारी भीड़ जमा होती है जहां वायरस के तेजी से फैलने का ज्यादा खतरा बना रहता है. बजट सत्र पर भी कोरोना की छाया नजर आई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 14 मार्च को समाप्त कर दिया जाएगा. हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फैसला कोरोना के भय से नहीं, बल्कि इस वजह से लिया गया है ताकि मंत्री जाकर क्षेत्र की स्थितियों का जायजा ले सकें. बजट सत्र में आने वाले बाहरी लोगों को रोकने के लिए पास जारी करने पर पाबंदी लगा दी गई है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगले 15 दिन काफी महत्व रखते हैं. उन्होंने लोगों को सार्वजनिक समारोहों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी. उन्होंने यह भी कहा कि अभी स्कूलों में परीक्षा चल रही है, इसलिए स्कूल-कालेजों को बंद करने का फैसला बाद में लिया जाएगा. सीएम ने आश्वस्त दिया कि लोग बेवजह न घबराएं. महाराष्ट्र में स्थिति खराब नहीं है इसलिए डरने की जरूरत नहीं है. इसी दौरान औरंगाबाद के महापौर नंदकुमार घोडले ने कोरोना के खतरे को देखते हुए अप्रैल से होने वाले औरंगाबाद नगर निगम के चुनाव स्थगित करने की मांग की है. उन्होंने मुख्यमंत्री व चुनाव आयोग से मांग की है कि नगर निगम के 6 महीने के विस्तार के लिए प्रशासक नियुक्त करने की बजाय वर्तमान पार्षदों और पदाधिकारियों को कार्यवाहक रूप में काम करने के लिए विस्तार दिया जाए क्योंकि प्रशासन व जनता के बीच पार्षद महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं.