कमल को लेकर सवाल, चुनाव चिन्ह कैसे बन सकता है पार्टी का ‘लोगो’

यद्यपि बीजेपी (BJP) 1980 में अपनी स्थापना के समय से ही चुनाव चिन्ह के रूप में ‘कमल’ (Kamal) का इस्तेमाल कर रही है और इसे लेकर कभी किसी ने आपत्ति नहीं जताई लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में जनहित याचिका दायर कर इसे चुनौती दी गई है. गोरखपुर के समाजवादी पार्टी नेता कालीशंकर (Kali Shankar) ने अपनी याचिका में कहा कि किसी राजनीतिक दल को चुनाव चिन्ह पार्टी के लोगो (प्रतीक चिन्ह) (Kamal as symbol) के रूप में इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है. चुनाव चिन्ह सिर्फ चुनाव तक सीमित है. इसके अलावा पार्टी को अपना चुनाव चिन्ह किसी निर्दलीय उम्मीदवार को देने का अधिकार नहीं है.

इस मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि आखिर किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पुष्प कमल चुनाव चिन्ह के रूप में कैसे दे दिया गया? इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी जिसमें चुनाव आयोग को अपना जवाब देना होगा. इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि चुनाव चिन्ह केवल चुनाव के लिए आवंटित किया जाता है, अन्य कार्य के लिए नहीं. फिर चुनाव चिन्ह के अलग उद्देश्य से इस्तेमाल की अनुमति क्यों दी जा रही है? यहां उल्लेखनीय है कि देश में कांग्रेस के चुनाव चिन्ह क्रमश: बैलजोड़ी, गायबछड़ा और इसके बाद पंजा रहे हैं लेकिन उसके ध्वज में चरखा बना रहता है. कांग्रेस अपने चुनाव चिन्ह का ध्वज या अन्य कही इस्तेमाल नहीं करती.

सपा भी अपने चुनाव चिन्ह साइकिल का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव में करती है. अदालत का सवाल इसलिए भी है कि बीजेपी अपने पार्टी अधिवेशनों, सभाओं के झंडों में, लेटर हेड पर कमल का इस्तेमाल करती है जो कि इलेक्शन सिंबाल के रूप में उसे चुनाव आयोग ने दे रखा है. चुनाव छोड़कर उसका उपयोग क्यों होना चाहिए? क्या बीजेपी के अलावा कुछ अन्य पार्टियां भी अपने चुनाव चिन्ह का इस प्रकार हर कहीं इस्तेमाल करती हैं? इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए तथा निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए. यदि चुनाव चिन्ह को चुनाव में इस्तेमाल करने के अलावा पार्टी हर उद्देश्य से अपनी पहचान ही बना ले तो क्या उसका ऐसा करना उचित है? हाईकोर्ट ने एक सार्थक सवाल उठाया है जिसे लेकर चुनाव आयोग को कैफियत देनी होगी. चुनाव आयोग को किसी चुनाव चिन्ह फ्रीज करने का भी अधिकार है. पहले भी वह कुछ मामलों में ऐसा कर चुका है.