Supreme court

    लोकतंत्र में पारदर्शिता होना अत्यंत आवश्यक है. सरकार को चाहिए कि जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सारा हिसाब सही-सही पेश करे. पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) को भी सरकार ने सूचना के अधिकार से परे रखा है. लोग यह नहीं समझ पाए कि प्रधानमंत्री राहत कोष पहले से मौजूद रहने के बाद भी अलग से पीएम केयर्स फंड की आवश्यकता क्यों आ पड़ी? इसमें कितनी रकम आई और कितनी खर्च हुई, इसे जानने का नागरिकों को अधिकार नहीं है. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से पूछा है कि आम बजट में टीकों की खरीद के लिए रखे गए 35,000 करोड़ रुपए कहां गए? सरकार इस रकम का पूरा हिसाब पेश करे.

    देश में टीकाकरण को लेकर सरकार से समस्त जानकारियां मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, (Justices DY Chandrachud) जस्टिस नागेश्वर राव व जस्टिस रवींद्र भट्ट की बेंच ने पूछा कि सरकार बताए कि इस 35,000 करोड़ की रकम का इस्तेमाल 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग के लोगों के मुफ्त टीकाकरण में क्यों नहीं किया जा सकता? इसके पूर्व कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सवाल किया था कि मौजूदा वित्त वर्ष के बजट में टीकाकरण के लिए आवंटित 35,000 करोड़ रुपए की राशि कहां गई? उन्होंने ट्वीट किया, ‘मई-टीका उत्पादन क्षमता 8.5 करोड़, टीका उत्पादन 7.84 करोड़, टीका लगा 6.1 करोड़.’

    जून-सरकारी दावा 12 करोड़ टीके आएंगे. आखिर कहां से? क्या दोनों वैक्सीन कंपनियों की उत्पादकता में 40 प्रतिशत का इजाफा हो गया? वैक्सीन बजट के 35,000 करोड़ कहां खर्च कर डाले?’ प्रियंका ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- ‘अंधेर टीका नीति, चौपट राजा.’ सुप्रीम कोर्ट ने टीका खरीद तथा वैक्सीन की कीमत के बारे में भी सरकार से सवाल किए. वैक्सीन के घरेलू व अंतराष्ट्रीय स्तर पर क्या दाम हैं? खरीद नीति में किस तरह पहले से तय कीमत को अमल में लाया गया? कितने प्रतिशत ग्रामीण आबादी को टीका लगा है? इस मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी जिसमें सरकार को पूरा स्पष्टीकरण व लेखा-जोखा पेश करना होगा.