मंत्रिमंडल विस्तार में, यूपी चुनाव पर नजर

    केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी ने 8 माह बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखा है. बीजेपी की स्थिति मजबूत रखने के लिहाज से उत्तरप्रदेश को केंद्र में अधिक प्रतिनिधित्व देना जरूरी भी था. जो 36 नए मंत्री बनाए गए हैं, उनमें से 7 यूपी के हैं. इस तरह से विस्तार में हर पांचवां मंत्री वहां से लिया गया है. इस तरह केंद्र सरकार में यूपी के कुल मिलाकर 16 मंत्री हो गए हैं. बीजेपी की निगाह 2024 में होने वाले आम चुनाव पर भी है क्योंकि 80 लोकसभा सीटों वाला उत्तरप्रदेश देश के प्रधानमंत्री के चयन में निर्णायक साबित होता रहा है. अब तक देश के अधिकांश पीएम यूपी से ही हुए हैं. 

    मोदी भी वाराणसी का  प्रतिनिधित्व करते हैं. केवल मोरारजी देसाई, पीवी नरसिंहराव, एचडी देवगौड़ा, आईके गुजराल और मनमोहन सिंह अन्य राज्यों के थे जबकि जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, वीपी सिंह, अटलबिहारी वाजपेयी यूपी से थे. यूपी से बनाए गए मंत्रियों में बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल की प्रमुख अनुप्रिया पटेल का समावेश है. प्रधानमंत्री ने अपने गृहराज्य गुजरात से मनसुख मंडाविया और पुरुषोत्तम रूपाला को मंत्री बनाया. नए राज्यमंत्री चौहान देवूसिंह भी गुजरात के खेडा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं. 2022 के अंत तक गुजरात में भी विधानसभा चुनाव होने वाला है. सूरत के सांसद दर्शन विक्रम जरदोश को भी पीएमओ में मंत्री बनाया गया.

    हालांकि मार्च 2022 में पंजाब में भी विधानसभा चुनाव होगा लेकिन वहां से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया. इतना अवश्य हुआ कि सिख समुदाय के हरदीपसिंह पुरी को राज्यमंत्री से तरक्की देकर कैबिनेट मंत्री बना दिया गया. तेलंगाना के जी. किशन रेड्डी को पदोन्नति दी गई क्योंकि आगे चलकर प्रधानमंत्री मोदी व अमित शाह चुनाव के समय उन्हें राज्य में पार्टी का चेहरा बनाना चाहते हैं. कर्नाटक में बीजेपी अपना वर्चस्व बनाए रखने को लेकर कृतसंकल्प है इसलिए वहां से 4 नए मंत्री शोभा करांदलजे, राजीव चंद्रशेखर, नारायण स्वामी व भगवंत खूबा को मंत्री बनाया गया. पीएम ने पिछड़े वर्ग के 12 मंत्री बनाए जिनमें वीरेंद्र कुमार और पशुपति कुमार पारस को कैबिनेट रैंक दिया गया है. महाराष्ट्र से लंबे समय से प्रतीक्षारत नारायण राणे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया.