Mafia officer collusion, where coal is there, there are disturbances

यूपीए सरकार के समय का कोयला घोटाला चर्चित रहा था जिनमें अपात्र लोगों को कोल ब्लाक आवंटित किए गए थे.

यूपीए सरकार के समय का कोयला घोटाला चर्चित रहा था जिनमें अपात्र लोगों को कोल ब्लाक आवंटित किए गए थे. अब भी जहां-जहां कोयला है, वहां-वहां गड़बड़ी व्याप्त है. सरकार की आंखों में धूल झोंकी जाती है. इसमें कोयला माफिया और कोलफील्ड अधिकारियों की मिलीभगत है. सीबीआई ने अवैध कोयला व्यापार के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करते हुए बंगाल सहित 4 राज्यों के 45 ठिकानों पर छापेमारी की. सीबीआई ने यह कदम कोयला माफिया अनूप मांझी के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद उठाया. ऐसे सबूत मिले हैं कि मांझी की ईस्टर्न कोलफील्ड के 2 जनरल मैनेजर और 3 सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलीभगत थी. बंगाल के अलावा बिहार, झारखंड और यूपी में भी छापे मारे गए. अनूप मांझी उर्फ लाल ईस्टर्न कोलफील्ड की कुनुस्तोरिया और कजोरा इलाके की लीज वाली खदानों से बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध खनन और चोरी किया करता था. इसमें ईसीएल, सीआईएसएफ और रेलवे की सांठगांठ थी. ईसीएल के विजिलेंस डिपार्टमेंट और उसके टास्क फोर्स ने मई 2020 से अवैध खनन होते देखा. बड़ी खुदाई मशीनों और ढुलाई के लिए उपयोग में लाए जानेवाले डम्परों व ट्रकों को जब्त किया गया. अनेक अवैध वेब्रिज का भी पता लगाया गया जिससे पता चला कि ईस्टर्न कोलफील्ड से संगठित रूप से अवैध कोयला खनन और ढुलाई की जाती थी. सीबीआई ने मांझी के अलावा कुनुस्तोरिया एरिया के जीएम अमितकुमार धर, काजोर एरिया के जीएम जयेशचंद्र राय, ईसीएल के सुरक्षा प्रमुख तन्मय दास, एरिया सिक्योरिटी इंस्पेक्टर धनंजय राय, सिक्योरिटी इंचार्ज देबाशीष मुखर्जी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. कोयला चोर माफिया, कोलफील्ड के उच्च अधिकारियों और सिक्योरिटी की मिलीभगत से यही साबित होता है कि बाड़ ही खेत को खा रही थी और रक्षक ही भक्षक बने हुए थे. जब सभी को इस कोयला तस्करी में हिस्सा मिलता था तो उन्होंने आपस में हाथ मिला लिए थे. इस बारे में शक तब हुआ जब 7 अगस्त 2020 को पांडवेश्वर एरिया की रेलवे साइडिंग में 9 मीट्रिक टन चोरी का कोयला पड़ा पाया गया. अज्ञात रेल अधिकारियों की इस चोरी में अपराधियों से सांठगांठ थी.