पहले से बदलाव आ गया आधुनिक तकनीक से सेना में छंटनी

    पुशबटन वारफेयर के जमाने में जब दूर तक मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) मौजूद हैं और पहले की तुलना में युद्ध के तौर-तरीके बदल गए हैं तो सेना में लाखों की तादाद में जवान (Indian Army) क्यों रखे जाएं? यही सब सोचकर केंद्र सरकार ने देश की 12.50 लाख सैनिकों (Soldiers) की फौज में से 1 लाख सैनिकों की छंटनी करने की तैयारी की है. इस बारे में रक्षा संबंधी संसदीय समिति की रिपोर्ट संसद में पेश कर दी गई है. सेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस कर आगामी कुछ वर्षों में लगभग डेढ़ लाख सैनिकों को सेवामुक्त कर दिया जाएगा. इस कदम से प्रति वर्ष 60 से 70 अरब रुपए की बचत होगी.

    उच्च सैनिक अधिकारियों ने संसदीय समिति को बताया कि सेना की एक लड़ाकू कंपनी में अभी 120 लोग रहते हैं लेकिन यदि इस कंपनी को तकनीक से लैस कर दिया जाए तो वही कार्य 80 लोग कर सकते हैं. सैनिकों की संख्या कम होने से बचने वाली धनराशि से सेना को तकनीक से लैस किया जा सकता है. अब सेना के पास इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम, नाइट विजन ग्लासेस, दूर तक मार करने वाली शार्प शूटिंग राइफल्स, आधुनिक एसएलआर, बारूदी सुरंग (लैंड माइंस) का पता लगाने वाली मशीनें, पहाड़ों पर लड़ाई के लिए बेहतर उपकरण मौजूद हैं. इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति हो जाने से सेना के तीनों अंगों (आर्मी, एयरफोर्स और नेवी) में बेहतर तालमेल सुनिश्चित हो गया है. कारगिल युद्ध में भी आर्मी की मदद करते हुए एयरफोर्स ने लेजर बम से ऊंचाई पर स्थित पाकिस्तानी फौज के बंकर उड़ा दिए थे.

    ऐसे ही बालाकोट पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) में एयरफोर्स की अहम भूमिका रही. सेना के तीनों अंगों में पहले भी सहयोग रहा है. 1971 के बांग्लादेश युद्ध के समय भी आर्मी व एयरफोर्स के अलावा बंगाल की खाड़ी में नेवी ने अपना शौर्य दिखाया था. पाकिस्तान की गाजी पनडुब्बी को नष्ट कर जलसमाधि दे दी थी. अब तो आधुनिक तकनीक, परमाणु शस्त्रों से लैस घातक मिसाइल, रॉफेल जैसे विमान आ चुके हैं. भारतीय सेना विश्व की चौथी बड़ी शक्तिशाली सेना है. इसमें जवान तो पर्याप्त हैं, काबिल अफसरों की जरूरत अधिक है.