Representative Image (IANS)
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भोपाल. मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में 10वीं और 12वीं की कक्षाओं (10th and 12th classes) के विद्यार्थियों (Students) के लिए 18 दिसम्बर से स्कूल नियमित रूप से संचालित होंगे। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि कोविड-19 (Covid-19)संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए गृह मंत्रालय, भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुक्रम में मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षण सत्र 2020-21 के लिए शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्रारंभ एवं संचालन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इन दिशा-निर्देर्शों के अनुसार मध्यप्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए 10वीं और 12वीं की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 18 दिसम्बर से स्कूल नियमित रूप से पूरे निर्धारित समय तक के लिए संचालित रहेंगे।” उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि कक्षा 9वीं एवं 11वीं के लिए विद्यार्थियों की दर्ज संख्या एवं उपलब्ध अध्यापन कक्ष के आधार पर प्राचार्य द्वारा स्थानीय स्तर पर कक्षाओं के संचालन के संबंध में निर्णय लिया जा सकेगा। अधिकारी ने बताया कि हालांकि, विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति माता-पिता एवं अभिभावकों की सहमति पर निर्भर होगी। माता-पिता एवं अभिभावकों द्वारा एक बार दी गई सहमति पूरे सत्र के लिए मान्य होगी।

उन्होंने कहा कि जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। जो विद्यार्थी विद्यालय की अपेक्षा ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ना चाहते हैं उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि आवासीय विद्यालय ‘डे स्कूल’ के रूप में खोले जा सकेंगे। विद्यालयों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही परिवहन सुविधा में वाहनों में समुचित शारीरिक दूरी सुनिश्चित की जाएगी और वाहनों को समय-समय पर सैनिटाइज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय स्कूलों में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति शत-प्रतिशत होगी। अधिकारी ने बताया कि विद्यालय में प्रार्थना, सामूहिक गतिविधियां, खेलकूद, स्विमिंग पूल आदि गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। किसी भी स्थिति में विद्यार्थी एक स्थान पर एकत्रित न हों इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा। शिक्षण सत्र के आरंभ एवं संचालन के लिए यह निर्देश सभी जिलों के कलेक्टर, सभी जिला शिक्षा अधिकारी और सभी सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास को दिए गए हैं।(एजेंसी)