कॉलेज के अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा आयोजित नहीं कर सकते, उदय सामंत का UGC को पत्र

मुंबई. देश में कोरोना के चलते पिछले 24 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है। इस बिच सभी स्कुल और कॉलेज की परीक्षाएं स्थगित कर दी थी। इसके बाद UGC ने कॉलेज की परीक्षा संबंधी कार्यक्रम घोषित कर कॉलेज के अंतिम वर्ष में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षाएं छोड़कर बाकि सब परीक्षा रद्द की थी। लेकिन अब राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने UGC को पत्र लिखकर अंतिम वर्ष के छात्रों को भी परीक्षा न लेने की मांग की है। 

उदय सामंत ने फेसबुक लाइव के माध्यम से संवाद साधा। उन्होंने बताया कि, महाराष्ट्र में कोरोना प्रकोप को देखते हुए हम छात्रों के स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में सोच रहे है। साथ ही इसकी सुचना UGC को दे दी है। वर्तमान में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार को देखते हुए, राज्य स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुसार जुलाई में स्नातक और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा आयोजित करना मुश्किल है। महाराष्ट्र में 8 से 10 लाख छात्रों के लिए परीक्षा लेना और वो भी कोरोना के समय में संभव नहीं होगा। इसके अलावा, छात्रों के स्वास्थ्य को खतरे में डालना उचित नहीं होगा। 

पत्र में क्या कहा सामंत ने?

– कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और लॉकडाउन के कारण, महाराष्ट्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों में परीक्षा और शैक्षणिक कार्यक्रम की योजना बनाने के लिए एक समिति नियुक्त की गई थी।

– 8 मई को सरकार ने इस समिति के रिपोर्ट को मंजूरी दी। कोरोना वायरस से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए छात्रों की सामाजिक दूरी, स्वास्थ्य और सुरक्षा को बनाए रखने की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के छात्रों के अलावा अन्य छात्रों को आगे प्रवेश देने का निर्णय लिया गया था। 

– हालांकि, वर्तमान में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार को देखते हुए, राज्य स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुसार जुलाई में स्नातक और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा आयोजित करना मुश्किल है। महाराष्ट्र में 8 से 10 लाख छात्रों के लिए परीक्षा लेना और वो भी कोरोना के समय में संभव नहीं होगा। इसके अलावा, छात्रों के स्वास्थ्य को खतरे में डालना उचित नहीं होगा। 

– इसलिए महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रेट देने के विकल्प को मान्यता देने की मांग पत्र में की गई है।