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    नयी दिल्ली. एक बड़ी खबर के अनुसार आज व्हाट्सएप (WhatsApp) भारत की मोदी सरकार (Narendra Modi Goverment) के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) पहुंचा है। अपने हलफनामे में आज व्हाट्सएप ने कहा है कि भारत सरकार आज यानी बुधवार से लागू होने वाली अपनी नई पॉलिसी पर रोक लगाए, क्योंकि इससे लोगों प्राइवेसी खत्म हो रही है।

    क्या कहती है व्हाट्सएप:

    इसके साथ ही व्हाट्सएप ने दिल्लीHC से यह अपील की है,  कि सोशल मीडिया को लेकर भारत सरकार की नई गाइडलाइन भारत के संविधान के मुताबिक यूजर्स की प्राइवेसी के अधिकारों का उल्लंघन या हनन करती है, क्योंकि सरकार द्वारा नई गाइडलाइन के मुताबिक अब सोशल मीडिया कंपनियों को उस यूजर्स की पहचान बतानी होगी जिसने सबसे पहले किसी मैसेज को पोस्ट या शेयर किया होगा।

    इसके साथ ही व्हाट्सएप ने स्पष्ट किया है कि यदि कुछ भी गलत होता है वह केंद्र सरकार की शिकायत के बाद अपने नियमों के मुताबिक उस यूजर पर जरुरी कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही व्हाट्सएप का कहना था कि उसका प्लेटफॉर्म एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है, इसलिए कानून का पालन करने के लिए व्हाट्सएप को इस एन्क्रिप्शन को भी अब तोड़ना होगा। ऐसे में सम्पूर्ण व्हाट्सएप यूजर्स की प्राइवेसी खतरे में आ जाएगी। फिलहाल भारत में व्हाट्सएप के अकेले करीब 55 करोड़ यूजर्स हैं।

    गौरतलब है कि सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म के तैयार किए गए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते फरवरी में कहा था कि यह बिल्कुल नाकाफी है। इसके साथ SC ने जारीअपने एक बयान में कहा कि OTTऔर सोशल मीडिया के लिए बनाए गए नए नियम फिलहाल बिना दांत और नाखून वाले शेर की तरह हैं, क्योंकि इसमें किसी प्रकार के दंड या जुर्माने का कोई भी प्रावधान नहीं है।

    सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने नए नियम पर कोर्ट की टिप्पणी पर अपनी सहमति जताई थी और कहा कि नए नियम OTT प्लेटफॉर्म को आत्मनियंत्रण का मौका देने के मकसद से बनाए गए हैं, लेकिन यह भी तर्क सही है कि बिना जुर्माना और दंड के प्रावधान के नियम का कोई मतलब नहीं है और यह पूरी तरह दंतहीन और निरर्थक है।

    विदित हो  कि इसी साल फरवरी में सरकार ने सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी जिसे लागू करने के लिए इन तमाम सोशल मीडिया कंपनियों को 90 दिनों का वक्त दिया था जिसकी डेडलाइन आज यानी 26 मई को खत्म होनेवाली है। मोदी सरकार की इस नई सोशल मीडिया गाइडलाइंस में साफ लिखा गया है कि देश में सोशल मीडिया कंपनियों को कारोबार की छूट है , लेकिन अब इस प्लेटफॉर्म के हो रहे दुरुपयोग को रोकना भी अहम है। 

    क्या है नयी सोशल मीडिया पॉलिसी :

    • अब इसमें दो तरह की कैटिगरी हैं: सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी।
    • अब सबको ग्रीवांस रीड्रेसल मैकेनिज्‍म भी बनाना पड़ेगा और अगले 24 घंटे में शिकायत दर्ज होगी और 14 दिन में इन मामलों को निपटाना होगा।
    • अब अगर यूजर्स खासकर महिलाओं के सम्‍मान से कोई भी खिलवाड़ की शिकायत हुई तो 24 घंटें में इस कंटेंट को हटाना होगा।
    • इसके साथ ही सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया को अब चीफ कम्‍प्‍लायंस ऑफिसर रखना होगा जो भारत का ही निवासी होगा।
    • वहीं अब साथ में एक नोडल कॉन्‍टैक्‍ट पर्सन रखना होगा जो कानूनी एजेंसियों के चौबीसों घंटे संपर्क में रहेगा।
    • इसके साथ ही अब एक मासिक कम्‍प्‍लायंस रिपोर्ट जारी करनी होगी।
    • इसके साथ ही सोशल मीडिया पर कोई खुराफात सबसे पहले किसने की, इसके बारे में भी सोशल मीडिया कंपनी को विस्तृत रूप से बताना पड़ेगा।
    • हर सोशल मीडिया कंपनी का भारत में एक स्थायी डाक पता रखना होना।
    • अब हर सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के पास उसके यूजर्स वेरिफिकेशन की व्‍यवस्‍था भी रखनी होगी।
    • ख़ास बात यह है कि सोशल मीडिया के लिए उक्त सारे नियम आज से ही लागू हो जाएंगे। वहीं सिग्निफिकेंड सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को फिलहाल तीन महीने का वक्‍त लगेगा।

    यह  होंगे OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स के लिए नए गाइडलाइंस:

    • OTT और डिजिटल न्‍यूज मीडिया को अपने बारे में पुरी और विस्‍तृत जानकारी देनी होगी। हाँ इनका रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य नहीं है।
    • अब इन दोनों OTT और डिजिटल न्‍यूज मीडिया को ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्‍टम लागू करना होगा। अगर कोई गलती पाई गई तो उन्हें खुद से रेगुलेट करना होगा।
    • इसके साथ ही OTT प्‍लेटफॉर्म्‍स को सेल्‍फ रेगुलेशन बॉडी भी बनानी होगी जिसे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या कोई नामी हस्‍ती ही निर्देशित करेगी।
    • अब सेंसर बोर्ड की तरह OTT पर भी उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन की व्‍यवस्‍था होगी। एथिक्‍स कोड टीवी, सिनेमा जैसा ही रहेगा।
    •  यह भी साफ़ कहा गया कि डिजिटल मीडिया पोर्टल्‍स को अफवाह और झूठ फैलाने का कोई अधिकार बिलकुल नहीं है।

    गौरतलब है कि इन आदेशों में जो जरुरी बात कही गयी थी, वह यह थी कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी वेबसाइट या मोबाइल एप पर फिजिकल कॉन्टेक्स पर्सन की भी जानकारी देनी होगी। इसमें अभी तक एक केवल भारतीय कंपनी  ‘कू’ नामक सोशल मीडिया कंपनी को छोड़ कर किसी अन्य कंपनी ने इनमें से किसी भी अधिकारी की कोई नियुक्ति नहीं की है।इसके साथ ही इसमें कहा गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हर महीने अपनी जरुरी रिपोर्ट भारत सरकार को जारी करनी होगी।