International Widow Day
International Widow Day

    मुंबई: हर किसी के अपनी शादी को लेकर और शादी के बाद वाले जीवन को प्यार से बिताने के अपने सपने होते हैं। लेकिन ये सपने सभी के पूरे हो जाएं, ऐसा जरूरी नहीं क्योंकि कई लोगों के साथ देखा जाता है कि शादी के बाद किसी बीमारी या किसी अन्य वजह से उनका पार्टनर इस दुनिया को अलविदा कह देता है। ऐसे में जब किसी महिला के पति का निधन हो जाता है, तो उसके हाथ दुख और निराशा लगती है। जो सपने महिला ने शादी से पहले अपनी आने वाली जिंदगी के लिए देखे होते हैं, वो सब टूट जाते हैं। यही नहीं, आज भी हमारा समाज विधवाओं को उस नजर से नहीं देखता है, जिसकी वो असल में हकदार हैं। ऐसे में इस समाज की जिम्मेदारी बनती है कि विधवाओं को भी बाकी लोगों की तरह दर्जा मिले। ऐसे में इन्हीं महिलाओं को सम्मान दिलाने के लिए हर साल 23 जून को अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस (International Widow Day) मनाया जाता है।

    बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जो विधवा महिलाओं के दर्द और टूटे हुए जीवन को पेश करती हैं। बॉलीवुड में कई ऐसी अभिनेत्री भी हैं जिन्होंने विधवा का किरदार निभाया जो कि काफी प्रभावित था। आज हम आपको ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताएंगे।

    प्रेम रोग- राज कूपर की फिल्म प्रेम रोग को वैसे तो रोमांटिक फिल्म कहा जाता सकता है, लेकिन इस फिल्म में विधवा के रोल में नजर आईं पद्मिनी कोल्हापुरी ने सभी को अपनी एक्टिंग से हैरान कर दिया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे मनोरमा शादी के अगले ही दिन विधवा हो जाती है। सुसराल में जेठ उसका रेप करते हैं और वह वापस अपने मायके लौट आती है. इसके बाद मनोरमा को जीवन के तमाम दुखों से अकेले लड़ते दिखाया जाता है।

    मदर इंडिया- 1957 में रिलीज हुई मदर इंडिया फिल्म में नरगिस ने एक विधवा महिला का सशक्त रोल प्ले किया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे पति के जाने के बाद एक अकेली औरत अपने बच्चों को पालती है और लोगों की गंदी नजरों से तक खुद को बचाती है। फिल्म पूरी नरगिस के आस पास ही घूमती दिखाई थी। इस फिल्म में नरगिस ने एक ऐसी अकेली मजबूत महिला का रोल किया था जो अंत में अपने बेटे तक को मार देती है।

    द लास्ट कलर- 2019 में रिलीज हुई द लास्ट कलर में नीना गुप्ता ने अपनी शानदार एक्टिंग की छाप छोड़ी थी. पूरी फिल्म नीना के आस-पास ही ज्यादा घूमती है. नूर यानी की नीना गुप्ता एक विधवा के किरदार में नजर आ रही हैं जिन्होंने अपने सारे सुखों को विधवा धर्म निभाने के लिए त्याग दिया है. नूरी की मुलाकात एक बार छोटी से होती है. इसके बाद इन दो महिलाओं पर फिल्म घूमती है। 

    मृत्युदंड- 1997 में रिलीज हुई मृत्युदंड में शानदार रोल प्ले करके माधुरी दीक्षित ने हर किसी को हैरान कर दिया था। फिल्म माधुरी एक बेबाक, मजबूत महिला के रोल में दिखाई गई थीं। फिल्म में माधुरी एक ऐसी महिला की भूमिका में थी जो अपने और समाज की अन्य महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ती है। इतना ही नहीं पति के निधन के बाद परेशानियों को झेलते हुए वह अपने पति की मौत का बदला भी लेती है। 

    वाटर 2005 में आई वाटर फिल्म ऐसे तो तमाम तरह के मैसेज देने वाली फिल्म थी। लेकिन फिल्म में लीजा रे , सीमा विश्वास, सरला करियावासम, लीज रोल में थीं. सरला करियावासम जो छोटी सी उम्र में विधवा हो जाती है और विधवा आश्रम आने के बाद भी वह अपनी आम जिंदगी के सपने देखती है। वही लीजा रे जो एक विधवा है लेकिन थोड़ी अलग है और अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। सीमा विश्वास इन दोनों का साथ देती है। फिल्म में इन तीनों एक्ट्रेस ने बहुत ही शानदार एक्टिंग पेश की थी। 

    दरअसल, सभी उम्र, क्षेत्र और संस्कृति की विधवाओं की स्थिति को विशेष पहचान दिलाने के लिए 23 जून 2011 को पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस मनाने की घोषणा की, और तब से हर साल इस दिन को 23 जून को मनाया जाता है। यहां आपको बताते चलें कि ब्रिटेन की लुंबा फाउंडेशन पूरे विश्व की विधवा महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर विगत सात सालों से संयुक्त राष्ट्र संघ में अभियान चला रही है।