Kangana Ranaut

    मुंबई: बॉलीवुड अदाकारा कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को अपने बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता है। कंगना हमेशा अपने किसी फिल्म के वजह से या अपने सोशल मीडिया अकाउंट के पोस्ट की वजह से, या तो कभी अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। कंगना सामाजिक और राजनीतिक हर एक मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखती नजर आती हैं। बॉलीवुड में  कंगना के पंगे की चर्चे बहुत है। अब कंगना ने पेगासस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 

    कंगना ने अपने इंस्टग्राम अकाउंट से एक स्टोरी पोस्ट की है और बताया कि राजाओं के पास लोगों पर नजर रखने के लिए कई विशेषाधिकार होते हैं। कई पत्रकारों, राजनेताओं और अन्य लोगों को पेगासस स्पाइवेयर के साथ लक्षित किया गया था और इसी बीच कंगना ने यह टिप्पणी की है। कंगना ने लिखा, ‘प्राचीन काल में भी महानतम राजा भेष बदलकर अपने देश, लोगों और अपने घरों में गुप्त रूप से यह जानने के लिए जाते थे कि उनकी प्रजा क्या बोल रही है या चर्चा कर रही है, यह अभ्यास प्रशासन का एक हिस्सा है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण रामायण में है। ऐसी ही एक यात्रा भगवान राम को आम लोगों के बीच मां सीता की धारणा के बारे में तब पता चला जब उन्होंने उनके बारे में गुप्त रूप से जाना।’

    कंगना आगे लिखती हैं, ‘कोई बड़ी बात नहीं है कि राजा असामाजिक अपनी प्रजा सामान्य मुद्दों और उनकी मानसिकता के बारे में जानना चाहे, यह उसका अधिकार, विशेषाधिकार और व्यवसाय है कि वह अपनी आंखें और कान खुले रखे। इसलिए लकड़बग्घे रोना बंद कर दें।’

    पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसका इस्तेमाल कंपनी सरकार, पत्रकारों और राजनेताओं सहित प्रमुख हस्तियों की जासूसी करने के लिए करती है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सरकारी एजेंसियों द्वारा किसी भी अनधिकृत अवरोधन (अनअथोराइज्ड इंटरसेप्शन) से इनकार किया है। 

    आपको बता दें पेगासस एक ऐसा सॉफ़्टवेयर है, जिसे आपके डिवाइस की सभी एक्टिविटी को ट्रैक करने के लिए एक अटैकर द्वारा आपके स्मार्टफ़ोन पर इंस्टॉल किया जा सकता है। स्पाइवेयर मूल रूप से 2016 में सुर्खियों में आया था, जब संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर को अपने फोन पर एक लिंक के साथ देश में प्रताड़ित कैदियों के बारे में एक टेक्स्ट मैसेज मिला, जिसे उन्होंने सिटीजन लैब के रिसर्चर्स को भेजा था। जांच के बाद, यह पाया गया कि लिंक एनएसओ ग्रुप से संबंधित बेसिक स्ट्रक्चर से जुड़े हुए थे। तब से स्पाइवेयर बहुत डेवलप हो गया है और अब एक जीरो-क्लिक अटैक बनने में कामयाब रहा है। इसका मतलब है कि टारगेट यूजर को स्पाइवेयर इंस्टॉल करने के लिए कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है, इस प्रकार इसका पता लगाना या रोकना असंभव हो जाता है। 

    पेगासस स्पाइवेयर (Pegasus Spy Ware) को क्यू सूट और ट्राइडेंट जैसे दूसरे नामों से भी जाना जाता है. स्पाइवेयर एपल के आईओएस में भी घुसपैठ कर सकता है, यही वजह है कि इसे उपलब्ध सबसे रिफाइंड प्रोडक्ट्स में से एक के रूप में जाना जाता है। बता दें पेगासस का उपयोग सरकारों द्वारा प्रति-लाइसेंस के आधार पर किया जाना था। हालांकि, मई 2019 में, कंपनी ने राज्य की खुफिया एजेंसियों और अन्य को स्पाइवेयर की बिक्री सीमित कर दी थी।एनएसओ ग्रुप अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बताता है कि वह सरकारी एजेंसियों की मदद करने, आतंकवाद और अपराध को रोकने और उसकी जांच करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाता है। कंपनी यह भी कहती है कि उसके पास संविदात्मक दायित्व हैं जिसके लिए उसके ग्राहकों को अपने उत्पादों के उपयोग को गंभीर अपराधों की रोकथाम और जांच तक सीमित करने की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनका उपयोग मानव अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए नहीं किया जाएगा।