श्वेता बसु प्रसाद का छलका दर्द, कहा- ‘ऑडिशन से ही काम मिले तभी…’

    मुंबई: आज यह जानकर हर कोई सदमे में है कि फिल्म ‘इकबाल’ और ‘मकड़ी’ में बाल कलाकार की भूमिका से अपनी शानदार अभिनय कला से सबको चौका वाली श्वेता बसु प्रसाद (Shweta Basu Prasad) इन दिनों नेटफ्लिक्स की फिल्मावली ‘रे’ की फिल्म ‘फॉरगेट मी नॉट’ में अभिनय को लेकर काफी प्रशंसा हो रही है। पत्रकारिता की विद्यार्थी रहीं श्वेता ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली है। सितार बजाने में वह निपुण है। भारतीय संगीत पर उन्होंने एक डॉक्यूमेंट्री ‘रूट्स’ भी बनाई जो काफी प्रशंसित फिल्म रही है। श्वेता ने बीते दो साल में ओटीटी पर खूब काम किया है। फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ में भी वह दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहीं। 

    अब श्वेता ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान कहा, ‘मेरे लिए अभिनय खाना बनाने जैसा है। फिल्म जगत में ऑडीशन बहुत जरूरी है। अब जाकर यह काफी व्यवस्थित है। मेरा मानना है कि कलाकारों को उनकी योग्यता के हिसाब से ही काम मिलना चाहिए। ऑडिशन से ही काम मिलना चाहिए तभी जाकर फिल्म जगत में काम का सही बंटवारा हो सकेगा। और, ये ऑडिशन आपको बहुत कुछ सिखाते हैं। हमेशा सीखते रहना चाहिए। बहुत जरूरी है हमेशा एक छात्र बने रहना। हर किरदार के साथ, हर प्रोजेक्ट के साथ. हर दिन किसी से प्रेरणा ली जा सकती है। बच्चों से सीखना चाहिए। कुदरत से सीखना चाहिए। सीखने के लिए संगीत का अभ्यास भी बहुत प्रेरणादायक होता है।’

    साथ ही श्वेता ने कहा, ‘थैंक यू सो मच! मैं इसे कॉम्प्लीमेंट के तौर पर लूंगी। एक कलाकार की सबसे बड़ी तारीफ यही होती है कि आप दर्शकों को अपने किरदार से चौंका दें। एक कलाकार के तौर पर मेरी कोशिश यही रहती है कि कुछ ऐसे करूं जिसकी दर्शकों को अपेक्षा ही न हो। हर किरदार की मैं पृष्ठभूमि लिखती हूं। उसका मनोविज्ञान समझने की कोशिश करती हूं। ‘फॉरगेट मी नॉट’ का किरदार भी बहुत विलक्षण हैं। उसका एक ग्राफ है। ये मेरे लिए बहुत ही अच्छा मौका था। मेरे परिवार में सिनेमा, संगीत और साहित्य को काफी प्रोत्साहित किया गया है।’