हमारी सभ्यता से लुप्त हो रहे ग़ज़ल संगीत: सिंगर संकेत तिवारी

सिंगर संकेत तिवारी ने हाल ही में उस्ताद गुलाम अली के मशहूर ग़ज़ल ‘हर एक बात’ को नए अंदाज में रिलीज किया. नागपुर के रहने वाले संकेत ने नवभारत से हुई विशेष बातचीत में बताया कि अपने जीवन में वो उस्ताद गुलाम अली साहब और उस्ताद मेहंदी हसन खान साहब से प्रेरित होते हैं .

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    मुंबई: सिंगर संकेत तिवारी ने हाल ही में उस्ताद गुलाम अली के मशहूर ग़ज़ल ‘हर एक बात’ को नए अंदाज में रिलीज किया. नागपुर के रहने वाले संकेत ने नवभारत से हुई विशेष बातचीत में बताया कि अपने जीवन में वो उस्ताद गुलाम अली साहब और उस्ताद मेहंदी हसन खान साहब से प्रेरित होते हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं.ऐसे में अपनी आवाज में उन्होंने पॉपुलर गजल ‘हर एक बात’ को खूबसूरत अंदाज में रिक्रिएट करके अपने संगीत गुरुओं को एक म्यूजिकल ट्रिब्यूट दिया है.

    इस गाने को बनाने के पीछे का मकसद साझा करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज के दौर में हमारी युवा पीड़ी ग़जल गीत सुनना नहीं पसंद कर रही है और उन्हें शोर-शराबे वाले गीत अधिक पसंद आ रहे हैं. हमारी सभ्यता से ग़जल गीत खोते जा रहे हैं और मेरी यही सोच थी कि हमारे उस्ताद जैसे गुलाम अली, मेहंदी हसन खान और उस्ताद तारी खान द्वारा बुने गए कई बेशकीमती ग़ज़लों को हम आज की पीड़ी के बीच एक नए जायके के साथ पेश करें.

    संगीत केवल मनोरंजन नहीं

    संकेत का मानना है कि संगीत का अस्तित्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है और उसमें कई भावनाएं भी सम्मिलित होती हैं जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं. अपने गाने पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस गीत को गीतेश यादव ने नए अंदाज में पिरोया है. गाने को बारीकी से समझते हुए उन्होंने इसमें कई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स जोड़े हैं और इस दरम्यान इस बात का भी ख्याल रखा कि इसकी असली महक बरकरार रखी जाए.