प्रतिकारात्मक तस्वीर
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दुनिया में मां बनने के एहसास से बेहतर कोई एहसास नहीं लेकिन 35 साल की उम्र के बाद गर्भवती हाने पर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बढ़ते उम्र के साथ-सथ महिलाओं के भीतर होने वाले बच्चे को लेकर तमाम

दुनिया में मां बनने के एहसास से बेहतर कोई एहसास नहीं लेकिन 35 साल की उम्र के बाद गर्भवती हाने पर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बढ़ते उम्र के साथ-सथ महिलाओं के भीतर होने वाले बच्चे को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं और डर जन्म ले लेते हैं. नन्हें मेहमान को तभी इस दुनिया में लाना चाहिए जब वो उसकी जिम्मेदारी उठाने कें लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएं. बच्चे को जन्म देने का एक सही समय होता है और उसी को ध्यान में रखकर आपको बच्चे के जन्म के बारे में विचार करना चाहिए। ज्यादा उम्र की महिलाओं से जन्मे लड़कों में दिल संबंधी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। एक हालिया शोध में यह दावा किया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि उम्रदराज माताओं के गर्भनाल में होने वाले बदलाव के कारण उनसे जन्मे लड़कों के स्वास्थ्य को आगे चलकर नुकसान पहुंच सकता है।

अच्छी बात यह है कि 30 की उम्र के बाद भी इस बात की उम्मीद रहती है कि आप प्राकृतिक रूप से गर्भाधान कर सकेंगी और एक स्वस्थ शिशु को जन्म देंगी। हालांकि, समय काफी तेजी से निकल सकता है, खासकर 35 साल की उम्र के बाद, क्योंकि इसके बाद आपके डिंब की गुणवत्ता घटने लगती है। 30 से 34 साल की उम्र में आपके गर्भवती होने की संभावना 26 से 29 साल के मुकाबले थोड़ी ही कम होती है। अगर आप 35 साल की उम्र के बाद गर्भवती होती हैं, तो दुर्भाग्यवश आपकी सफल गर्भावस्था की संभावना कम होती है। उम्र के साथ-साथ गर्भपात की दरें भी धीरे-धीरे, मगर निरंतर बढ़ती रहती हैं। 35 से 40 की उम्र में बच्चे को जन्म देने से बच्चे को स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिसमें सबसे ज्यादा ऑटिज्म होने का खतरा रहता है। साथ ही महिलाओं में गर्भपात होने की संभावना भी सबसे ज्यादा रहती है।

अगर आप 35 साल की उम्र के बाद गर्भवती होती हैं, तो आपकी गर्भावस्था में जटिलताएं उत्पन्न होने की संभावना अधिक रहती है। इन जटिलताओं में शामिल हैं:

-अस्थानिक (एक्टोपिक) गर्भावस्था

-प्लेसेंटा प्रिविया

-समय से पहले जन्म (प्रीमेच्योर)

-कम जन्म वजन शिशु

पोषण का बंटवारा करना मुश्किल

ज्यादा उम्र में गर्भधारण करना मां के लिए काफी महंगा साबित होता है क्योंकि उसके शरीर के लिए बच्चों के साथ पोषण का बंटवारा करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध के दौरान देखा गया कि उम्रदराज मां और मादा भ्रूण के मामले में गर्भनाल फायदे देता हुए पाया गया। इस दौरान गर्भनाल में सकारात्मक बदलाव देखे गए जो भ्रूण के विकास को ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं। वहीं शोध में पता चला कि नर भ्रूण के मामले में उम्रदराज माताओं का गर्भनाल कमजोर हो जाता है और ठीक से अपना काम नहीं कर पाता।