What is the story of 'Hand of God', which makes England players cry

इस मैच को देखने वाले और उस वक़्त के गवाह रहे फुटबॉल के प्रशंसक शायद ही कभी भूल पाए हों।

-विनय कुमार

फीफा वर्ल्ड कप-1986 (FIFA WORLD CUP, 1986) में इंग्लैंड (England) और अर्जेंटीना (Argentina) के बीच क्वार्टर फाइनल (Quarter Final) की भिड़ंत थी। इस मैच को देखने वाले और उस वक़्त के गवाह रहे फुटबॉल के प्रशंसक शायद ही कभी भूल पाए हों। इस मैच में किया गए एक गोल ने तस्वीर बदल कर रख दी थी। यही नहीं, फुटबॉल के इतिहास में सबसे विवादास्पद गोल साबित हुआ। इस एक गोल ने ‘फीफा वर्ल्ड कप’ जीतने का सपना तोड़ दिया था और इस मैच की विजेता रही अर्जेंटीना और 2 दो मैचों के बाद ‘वर्ल्ड चैम्पियन’ (FIFA WORLD  CUP CHAMPION) बन गई। उस ऐतिहासिक विवादित गोल को “हैंड ऑफ गॉड” (Hand of God) नाम मिला। ये गोल अर्जेंटीना के कप्तान डिएगो माराडोना ने दागा था।  

कहानी ‘हैंड ऑफ गॉड’ की  

1986 के ‘फीफा वर्ल्ड कप’ (FIFA World Cup 1986) के क्वार्टर फाइनल (Quarter Finals) में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच मुक़ाबला था। इस बात से खेलप्रेमियों को और खिलाड़ियों की यकीन था कि इंग्लैंड और अर्जेंटीना की ये भिड़न्त बेहद रोमांचक और दिलचस्प तो होगा ही, तनावपूर्ण भी होगा। इस मैच के फर्स्ट हाफ में एक भी गोल नहीं हुआ। सेकंड हाफ में अर्जेंटीना और इंग्लैंड ने की तरफ से एक-एक गोल किया गया। मैच का निर्धारित समय करीब आ रहा था। भिड़ंत और तनावपूर्ण हो चुकी थी। 90 मिनट ख़त्म होने को सिर्फ़ 6 मिनट बचे थे, इसी समय इंग्लैंड के गोलकीपर के डी एरिया में कुछ ऐसा हो गया मैदान पर कुछ ऐसा हुआ, जिसे देखकर इंग्लैंड टीम (England) के खिलाड़ी ही नहीं, इंग्लैंड टीम के लाखों प्रशंसक रोने लगे।  

‘फीफा वर्ल्ड कप’ के इतिहास का सबसे विवादास्पद गोल 

मैच पूरे शवाब पर था। इस मैच को जीतने के लिए दोनों तरफ से जान झोंकी जा रही थी।अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने इंग्लैंड के गोल एरिया में  बॉल पास किया, बॉल डिएगो माराडोना के कब्ज़े में आई। पालक झपकते ही डिएगो माराडोना ने बॉल अपने साथी होर्ग वाल्डोना को पास किया। वाल्डोना इस पास को संभाल नहीं पाए और बॉल वाल्डो की पहुंच से निकल गई और विरोधी टीम इंग्लैंड के मिडफील्डर स्टीव हॉज के कब्ज़े में आ गई।  हॉज गेंद को मारकर अर्जेंटीना को पेनल्टी कॉर्नर दे सकते थे। लेकिन, उन्होंने गोलकीपर पीटर शिल्टन की तरफ शॉट खेला ताकि बॉल गोलकीपर के हाथ सुरक्षित लग जाए। ठीक इसी समय डिएगो माराडोना चीता की फूर्ति के साथ बॉल के संपर्क में आए और बॉल गोलपोस्ट के अंदर।सभी देखते रह गए, जो हुआ उसे देखकर।    

माराडोना ने बॉल हेड करने की कोशिश की। बॉल सिर पर लगने से पहले उनके हाथ में लगी और इंग्लैंड के गोलपोस्ट में चली गई। अर्जेंटीना के खिलाड़ी समझ नहीं पाए आखिर क्या हो गया। बॉल गोलपोस्ट के नेट के अंदर जा चुकी थी, पर अर्जेंटीना के खिलाड़ी चीयर करते नहीं दिखे। वहीं दूसरी तरफ़, टीम इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने रेफरी अली बिन नेसार से बहस करते हुए कहा कि बॉल माराडोना के हाथ से लगी है। रेफरी अली बिन नेसार ने इंग्लैंड के खिलाड़ियों की बात नहीं मानी, और इसे गोल करार दिया। हालांकि, बाद में, रीप्ले में देखा गया, तो बॉल  माराडोना के सिर से बहुत दूर थी, और उनके हाथ से लगकर गोलपोस्ट के नेट में घुस गई थी। आख़िर में, अर्जेंटीना ने इस मैच को 2-1 से जीत लिया और सेमीफाइनल में पहुंच गई। इसके बाद सेमि-फाइनल और फाइनल भी अर्जेंटीना की टीम ने जीता और ‘फीफा वर्ल्ड कप’ (FIFA World  Cup-1986) हासिल कर इतिहास रच गई।  

कितने साल बाद माराडोना ने मानी गलती   

20 साल बाद इस विवादास्पद गोल पर माराडोना ने माना कि बॉल उनके हाथ से लगी थी। ख़ास बात तो ये भी है की, उस यादगार मैच के बाद मैच के रेफरी अली बिन नेसार ने कहा था, “मैंने बॉल स्पष्ट रूप से नहीं देखा। मैंने दूसरे रेफरी दोकव को देखा। लेकिन उन्होंने कोई संकेत नहीं दिया। उस स्थिति में, मैंने अर्जेंटीना के हित में फैसला दे दिया।”