आरक्षण कृति समिति ने दी दस्तक, आंदोलन में विभिन्न 80 संगठन हुए शामिल

    गड़चिरोली. संविधानिक अधिकार तथा आरक्षण समाप्त करने की साजिश करने का आरोप करते हुए विभिन्न 80 संगठनों की एकत्रित आरक्षण कृति समिति ने सरकार के खिलाफ आज शनिवार 26 जून को जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा निकाला गया. इस मोर्चे में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए थे. जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा पहुंचने के बाद प्रतिनिधि मंडल द्वारा जिलाधिकारी को विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा गया.

    सरकार पिछड़े प्रवर्ग के संविधानिक अधिकार तथा आरक्षण समाप्त करने का षड्यंत्र कर रही है. इसके खिलाफ सभी पिछड़े प्रवर्ग के आरक्षण व अन्य मांगों को आरक्षण के जनक राजर्षि शाहू महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में उन्हें अभिवादन कर आरक्षण हक्क कृति समिति की ओर से समिति के मुख्य संयोजक फरेंद्र कुत्तीरकर, सह संयोजक देवानंद फुलझेले, गौतम मेश्राम आदि के नेतृत्व में स्थानीय आईटीआई चौक से जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा निकाला गया.

    सरकार के खिलाफ घोषणाएं देते हुए मोर्चे ने जिलाधिकारी कार्यालय पर दस्तक दी. इसके पश्चात प्रतिनिधि मंडल द्वारा मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया. आंदोलन में ऑल इंडिया एम्प्लाईज फेडरेशन के भरत येरमे, अखिल भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के रोहिदास राऊत, कास्ट्राईब कर्मचारी कल्याण महासंघ के विजय बन्सोड, हलबा- हलबी कर्मचारी महासंघ के माधव गावल, काट्राईब ग्रामसेवक संगठन के मनोज गेडाम, नेशनल आदिवासी महिला फेडरेशन के जयश्री येरमे, वरीष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता कुसुम अलाम, माली समाज संगठन के अशोक मांदाडे, शिक्षा विस्तार अधिकारी संगठन के दीपक देवतले, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के विलास निंबोरकर, निजी माध्यमिक शिक्षक संगठन के राहुल बनकर, डा. सुरेश गोंगले, डा. सुनिल मडावी, विलास मांडवे, डा. हेमंत बारसागडे, पंढरी इंगोले, प्रा. डा. संतोष सुरडकर, संदीप रहाटे, संजय राठोड, डा. नारायण कर्रेवार, राज बोड, श्याम रामटेके, शलिक मानकर, धनराज दुधकुंवर, दीपक चौधरी, दीपक मांडवे, वसंत पवार, शैलेश वाशिमकर, तारका जांभुलकर, ज्योति मेश्राम आदि उपस्थित थे. 

    इन मांगों का समावेश

    पिछड़े वर्ग के कर्मियों को पदोन्नति दें, मंत्रालय के अधिकारियों ने षड्यंत्र कर पिछड़े वर्गीयों की पदोन्नति बंद करने हेतु जिम्मेदार लोगों पर एट्रासिटी तथा आरक्षण अधिनियम 8 अंतर्गत मामले दर्ज करें. मंत्रीगुट समिति के अध्यक्ष पद से मंत्री अजित पवार को निष्काषित कर पिछड़ेवर्ग के मंत्री की नियुक्ति करें. कामगार व कामगार संगठन विरोधी किए गए बदलाव रद्द करें, विदेश छात्रवृत्ति के लिए उत्पन्न की शर्त रद्द करें, विदेश छात्रवृत्ति की संख्या कर्नाटक के तर्ज पर 450 प्लस करें, व्यावसायिक अभ्यासक्रम के लिए फ्रीशिप योजना राज्य के बाहर भी लागू करें, व्यावसायिक उच्च शिक्षा के लिए बंद की गई फ्रीशिप पूर्ववत शुरू करें, विदेश छात्रवृत्ति के छात्रों को निर्वाह भत्ता छात्रवृत्ति की राशि अदा करते समय डालर रेट के तहत अदा करें, नई शैक्षणिक नीति में तथा निजी विश्वविद्यालय में पिछड़ेवर्गीयों को छात्रवृत्ति व फ्रीशिप योजना लागू करें, सरकारी कंपनी, विभाग, बैंक का निजीकरण, ठेका पद्धति बंद करें.

    जहां किया है वहां नियमों के तहत आरक्षण लागू करें, नौकरी का 4.7 लाख का बैकलॉग भरने के लिए विशेष भर्ती मुहिम चलाकर पिछड़ेवर्गीय सुशिक्षित बेरोजगारों को नौकरियां दें, किसान विरोधी किए गए कानून पीछे लेने के लिए आंदोलन किया जा रहा है. केंद्र सरकार किसानों से चर्चा कर न्याय दें, कोरोना मरीजों का बीमा खर्च सरकार करे आदि समेत आदि मांगों का समावेश है.