भारत बंद को सर्वदलीय समर्थन, जिले में भी आंदोलन करने की पत्रपरिषद में दी जानकारी

गडचिरोली. केंद्र सरकार ने किसी को न मानते हुए बहुमत के जोर पर किसानों को बर्बाद करनेवाले 3 कानुन पारीत किए है. इन कानुन के खिलाफ देशभर में जनआक्रोश व्यक्त होता दिखाई दे रहा है. ऐसे में मंगलवार 8 दिसंबर को देशभर में किसानों द्वारा भारत बंद का ऐलान किया गया है. इस आंदोलन को जिले में भी समर्थन दिया होकर सभी दलों की ओर से भारत बंद के आंदोलन में सहभागी होने की जानकारी सर्वदलीय नेताओं ने सोमवार 7 दिसंबर को आयोजित पत्रपरिषद से दी है. 

पत्रपरिषद में बताया कि, केंद्र की भाजपा व मोदी सरकार ने किसानों को बर्बाद करनेवाले 3 काले कानुन पारीत किए है. यह कानुन पिछे लेने के लिए कांग्रेस की ओर से 2 अक्टूबर को समुचे राज्य में धरना आंदोलन किया गया. वहीं समुचे देश में कानुन पिछे लेने के लिए हस्ताक्षर मुहिम चलाकर राष्ट्रपति को ज्ञापन पेश किया गया. मात्र केंद्र की  हुकूमशाही व मुजोर सरकार ने कानुन पिछे नहीं लिया. जिससे देशभर के किसानों ने 26 नवंबर से आंदोलन शुरू किया है. विगत 10 दिनों से उक्त आंदोलन शुरू होने के बावजूद केंद्र सरकार मात्र दबावतंत्र के माध्यम से किसानों का आंदोलन दबाने का प्रयास किया है.

केंद्र सरकार आंदोलन की सुध नहीं लेने समुचे देशभर में मंगलवार को भारतबंद की घोषणा की है. इस भारत बंद के दौरान सर्वदलीय नेताओं की ओर से कल आंदोलन किया जोनवाला है. ऐसी जानकारी सर्वदलीय नेताओं ने पत्रपरिषद में दी. पत्रपरिषद में पूर्व विधायक तथा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डा. नामदेव उसेंडी, अखिल भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष रोहिदास राऊत, भाकपा के जिला सचिव देवराव चवले, जिप सदस्य एड. राम मेश्राम, शिवसेना उपजिला प्रमुख अरविंद कात्रटवार, राकां के शहर अध्यक्ष विजय धकाते, कांग्रेस के फहिम काजी, शेकाप के  खजिनदार श्यामसुंदर उराडे, शेकाप के जिला युवक अध्यक्ष अक्षय कोसनकर, कांग्रेस किसान सेल के जिलाध्यक्ष वामन सावसाकडे, जिप सदस्य मनिषा दोनाडकर, कांग्रेस ओबीसी सेल अध्यक्ष पांडूरंग घोटेकर, मनोहर नवघडे, रजनीकांत मोटघरे, राकां के जिला सचिव संजय कोचे, अभा रिपब्लिकन पार्टी के जिला सचिव हंसराज उंदिरवाडे, काशिनाथ भडके आदि समेत सर्वदलीय पदाधिकारी उपस्थित थे. 

निकाली केंद्र सरकार की अंतिम यात्रा

केंद्र सरकार के किसान विरोधी कानुन के खिलाफ सोमवार को जिला के कांग्रेस के नेतृत्व में सर्वदलीय पदाधिकारियों की ओर से अंतिम यात्रा निकाली गई. स्थानीय विश्रामगृह से उक्त अंतिम यात्रा निकालकर इंदिरा गांधी चौक मं लायी गई. प्रतिकात्मक अंतिम यात्रा के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया गया. आंदोलनकर्ताओं ने उक्त किसान विधेयक रद्द करे, ऐसी घोषाएं दी. इस आंदोलन में जिला कांग्रेस के अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक डा. नामदेव उसेंडी, युवक कांग्रेस के अध्यक्ष महेंद्र ब्राम्हणवाडे, जिप सदस्य एड. राम मेश्राम, किसान सेल अध्यक्ष वामनराव सावसागडे, सतीश विधाते, रजनीकांत मोटघरे, एजाज शेख, समय्या पसूला, मनीषा दोनाडकर रमेश चौधरी, कुणाल पेंदोरकर, निनाद देठेकर, मिलिंद खोब्रागडे, प्रतीक बारसिंगे, कमलेश खोब्रागडे, दिवाकर निसार, महेश जललेवार, निखिल खोब्रागडे, पंकज बारसिंगे, गोवर ऐनप्रेड्डीवार, निलेश अंबादे इनके साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना, शेकाप, भाकपा आदि दलों के पदाधिकारी व कार्यकर्ते सहभागी हुए थे.