28 सितंबर से 5 अक्टूबर तक प्रस्तावित जनता कर्फ्यू पर पुर्नविचार की अपील

आरमोरी. जिले समेत तहसील में बढ रहे कोरोना बाधितों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए तहसील के पुलिस और प्रशासन ने 28 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच जनता कर्फ्यू का निर्णय लिया है। किंतु यह निर्णय सामान्य और गरीबों के लिए उपयुक्त न होने से इस पर पुर्नविचार करने की अपील चिल्लर व्यापारी, किसान, कामगार, लघुउद्योग संगठना ने की है। प्रस्तावित जनता कर्फ्यू रद्द न करने पर सविनय भंग आंदोलन की चेतावनी संगठना ने दी है।

तहसीलदार और थाने को दिये निवेदन में कहा कि प्रशासन द्वारा जनता कर्फ्यू का निर्णय भले जनहितार्थ है किंतु व्यावहारिक दृष्टि से सामान्य, गरीब और निचले तबके वालों के लिए अनुचित है। क्योंकि तीन महीने पर तक चले लाकडाउन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है तो आम लोगों क्या हाल हुआ होगा। रोज कमाकर खाने वाले तो दाने दाने को मोहताज हो गये। समाजसेवी और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से उनका पेट कुछ भरता रहा। किंतु अब तो इन लोगों का यह हाल है कि कोरोना से बाद में यह भूख से  मर जाएंगे। तीन महीने से प्रशासन के सभी निर्णय का सभी ने पालन किया है किंतु अब हालात काफी बिगड गये है इसलिए प्रस्तावित जनता कर्फ्यू पर पुर्नविचार करने की मांग की है। इस पर विचार न किये जाने पर कर्फ्यू को चुनौति देने सविनय भंग आंदोलन की चेतावनी दी है। निवेदन सौंपने वालों में राहुल जुआरे, सतीश पेंदोरकर, निखिल प्रहार, रंजत बनकर आदि का समावेश है।