दर्जनों गांवों के लिये काल बन रही बांडे नदी, पुलिया के अभाव में ग्रामीणों का जानलेवा सफर जारी

    एटापल्ली. नक्सलग्रस्त गड़चिरोली जिले में विकास किस हद तक हुआ है. इसका जीता जागता उदाहरण तहसील के आदिवासी बहुल कुदरी गांव पहुंचने पर दिखायी देगा. प्रतिवर्ष कुदरी के दर्जनों गांवों के लिए बांडे नदी काल बनकर सामने खड़ी होती है. बारिश के दिनों में लगातार चार महीनों के लिये इन गांवों का संपर्क पूरी दुनिया से कट जाता है.

    अन्य गांवों तक पहुंचने के लिये प्रशासन ने अब तक क्षेत्र में पक्की सड़कों का निर्माण नहीं किया है. वहीं बांडे नदी पर पुलिया का निर्माण नहीं किये जाने से क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीण बारिश के दिनों में बुनियादी साहित्यों के लिए तरस जाते हैं. स्वाधीनता के 7 दशकों के बाद भी यह क्षेत्र विकास की मुख्य धारा में जूड़ऩे के लिए तरसता दिखायी दे रहा है.  एटापल्ली तहसील का अधिकांश हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से सटा हुआ है. तहसील के आदिवासी बहुल कुदरी गांव से सटकर बांडे नदी है. 

    दशकों से नदी पर पुल नहीं

    नदी पर दशकों से पुल का अभाव है. नदी को पार किये बिना मवेली, मोहुर्ली, हेलकसा, वेलमागढ़, बुर्गी, पिपली, कुंडूम, जवेली, कचरेल, रेगदंडी आदि गांवों तक पहुंचा नहीं जा सकता.  क्षेत्र के उपरोक्त दर्जनों गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधा भी इन गांवों तक पहुंच नहीं पायी है.

    अहेरी विधानसभा क्षेत्र में समाविष्ट यह पूरा क्षेत्र विकास की राह से भटक गया है.  लेकिन क्षेत्र के विकास की ओर न तो स्थानीय प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि. छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से सटा होने के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों के नागरिक छत्तीसगढ़ राज्य के गांवों पर ही निर्भर रहते हैं. रोजमर्रा के साहित्यों के लिए यहां के नागरिक पैदल ही छग राज्य में पहुंचते हैं. इस वर्ष भी आनेवाले दिनों में क्षेत्र के नागरिकों को जानलेवा सफर करने की नौबत आ गई है.

    मरीजों को 4 माह परेशानी

    क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह लचर अवस्था में है. किसी भी प्रकार की चिकित्सा के लिये यहां के आदिवासी ग्रामीणों को एटापल्ली स्थित ग्रामीण अस्पताल पहुंचना पड़ता है. लेकिन बारिश के लगातार चार महीनों तक यहां पहुंचने के लिये सड़क ही उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सा के अभाव में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. बता दें कि, इसी मौके का लाभ उठाकर क्षेत्र में मांत्रिकों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है. किसी भी बीमारी से त्रस्त मरीजों द्वारा मांत्रिकों से इलाज करने से उन्हें अनायस ही मौत का ग्रास बन जाना पड़ता है.