आदिवासी को भेटवस्तू देकर मनाई ‘दिवाली’

  • मुंबई के सामाजिक संस्थाओं का अनोखा उपक्रम

अहेरी. आदिवासीबहूल, संवेदनशील व नक्सलग्रस्त क्षेत्र के रूप में पहचाने जानेवाले कमलापूर परिसर अब भी अविकसीत है. फलस्वरूप यहां के अशिक्षित, अज्ञानी, गरीब, आदिवासी आज भी पिछडा है. दीपावली के उपलक्ष्य में इन आदिवासींयों में प्रकाशमय वातावरण निर्माण करने के उद्देश से मुंबई के विभीन्न सामाजिक संस्था के पदाधिकारियों ने सिधे दुर्गम गांव में पहुंचकर आदिवासींयों के साथ आनंददायी दिपावली मनाई. संस्था के इस नाविण्यपूर्ण उपक्रम के कारण दुर्गम क्षेत्र आदिवासियों के चेहरे खिल उठे है. 

जिले के अतिदुर्गम, नक्सलग्रस्त क्षेत्र में अबतक विकास नहीं पहुंचा है. जिससे स्वाधितना के 7 दशक बात भी इस क्षेत्र के नागरिकों के साथ दुर्भाग्य कायम है. ऐसा ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में अहेरी तहसील के कमलापूर परिसर की पहचान है. आज भी दुर्गम क्षेत्र में सडके, नदी-नालों को पुलियां, बिजलीसेवा, रोजगार नहीं पहुंचा है. नक्सल गतिविधियों के कारण इस दुर्गम क्षेत्र के विकास में रूकावटे निर्माण हुई है. जिससे यहां का आदिवासी बांधव आज भी शिक्षा से वंचित है. आज भी यहां के आदिवासीयों के शरीर पर उचित पोशाख भी नहीं होने का वास्तव है. इस अतिदुर्गम क्षेत्र का पिछडापन ध्यान में लेते हुए मुंबई के जॉय ऑफ हॅप्पीनेस, भ्रमंति महाराष्ट्र की, स्वराज्य सोशल वेल्फेअर ऑरगॅनिझशन फाउंडेशन व अलर्ट सिटीझन फोरम इस  सामाजिक संस्था आगे आकर इस वर्ष दीपावली इस गरीब आदिवासियों के साथ मनाने का निर्णय लिया है. 

जिसके तहत कमलापूर परिसर के मोदुमडगू व नैनगुडम इस दुर्गम क्षेत्र में पहुंचकर इस संस्था के पदाधिकारियों ने यहां के आदिवासी बांधवों को ब्लैंकेट, सोलर दिप आदि समेत विभीन्न वस्तओं का वितरण किया गया. वहीं महिलाओं को साडी भेट दी गई. दीपावली के पर्व पर भेटवस्तू प्राप्त होने से आदिवासी बांधवों के चहरे खुशी से खिल उठे. मुंबई के संबंधित संस्था के इस नाविन्यपूर्ण उपक्रम की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है.