जिले में कोरोना की वर्षपूर्ति, सालभर बाद भी कोरोना की स्थिति चिंताजनक

    • कोरोना ने छिना कईयों का रोजगार  
    • कोरोना के साथ जीने की पड रही आदत

    चामोर्शी: देश समेत राज्य में 22 मार्च 2020 को बढते कोरोना संक्रमण से लॉकडाऊन, संचार बंदी की घोषणा हुई और गाव गाव में, घर घर में शांती फैली थी. इसमें आम आदमी पर अधिक परिणाम हुआ. तो कुछ लोग राजनिति कर रहे थे. मात्र इसमें पिसा गया आम आदमी. आज इस घटना को एक साल  पुरा हो रहा है. साल भर बाद भी कोरोना ने सभी के तनमन में डर का माहौल निर्माण हुआ है. सालभर बाद भी कोरोना महामारी का संक्रमण शुरू होने से ‘मेरा परिवार, मेरी जिम्मेदारी’ कहने की नौबत आन पडी है.

    पुरे देश समेत राज्य में बढते कोरोना संक्रमण से लॉकडाऊन, संचारबंदी की घोषणा हुई. परिणामत: सभी ओर खामोशी फैल गयी थी. आज 22 मार्च 2021 को कोरोना महामारी को पूरा एकर्ग्ष हुआ है. इस समयावधि में कईयों की नौकरियां गयी. मजदूरों का जीवन सर्वस्वी दैनंदिन मजदूरी पर निर्भर था, उनका रोजगार छिना गया. तो छोटे बडे व्यावसायिकों के व्यवसाय डूब गए. कईयों की रोजीरोटी व स्वयं के पास होनेवाली पुंजी भी खत्म होने से भटकना पडा. कोरोना के कारण कईयों को अपनी जान गवानी पडी.

    फलस्वरूप कईयों का सहारा छिना गया तो कईयों को कोरोना के कारण आर्थिक भुर्दंड सहन करना पडा. बेरोजगारों को रोजगार नही. लॉकडाऊन, संचारबंदी के कारण शादी समारोह, धार्मिक कार्यक्रम आदि पर निर्बंध आने से इस पर निर्भर होनेवाले व्यावसायिकों पर भुखमरी की नौबत आन पडी. स्वास्थ्य अधिकारी, कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, कर्मचारियों को कोरोना महामारी में अपने परिवार से दूर रहना पडा यह वस्तुस्थिति है.

    महाराष्ट्र कोरोना से मुक्ती की दिशा में चलते हुए फिर एक बार कोरोना ने अपना प्रकोप दिखाना शुरू करने से कुछ जगह सरकार ने फिर से धार्मिक स्थल, शासकीय कार्यालय, बाजार आदि जगह भीड को टालने शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए है तो कुछ जिलों में लॉकडाऊन, संचारबंदी लागू करने से फिर वही दिन  आम नागरिकों को सहन करने पड रहे है.

    कोरोना समयावधि में रेशनकार्डधारक परिवार को कुछ माह मुफ्त राशन दिया गया. इसका लाभ नागरिकों ने लिया तो कुछ सामाजिक संस्थाओं की ओर से जरूरतमंदों को जीवनावश्यक साहित्य वितरित कर उन्हें सहारा देने का कार्य किया गया. कोरोना से आम नागरिको को कब छूटकारा मिलेगा? बेरोजगार, मजदूरो को रोजगार मिलेगा क्या? व्यवसाय पहले के जैसे होंगे क्या? यह सभी सवाल उपस्थित हो रहे है. इन सभी को न्याय कब मिलेगा इस चिंता में आम नागरिक होकर राज्य समेत जिला पहले जैसा कब होगा इसकी राह आम नागरिको को एक वर्ष बाद भी कायम है.

    महामारी में महंगाई से नागरिक त्रस्त 

    कोरोना महामारी के दौरान सरकार महंगाई पर  काबू नही पा सकी. फलस्वरूप पेट्रोल, डिझेल, गैस व जीवनावश्यक वस्तुओं के दाम दिनोंदिन बढते दिखायी दे रहे है. फलस्वरूप आम नागरीक इससे काफी त्रस्त हो गए है. इस एकर्ग्ष के कार्यकाल में आम नागरिकों को मास्क लगना, सोशल डिस्टन्सिंग का पालन, भीड टालना आदि नियमों का पालन करना पडा. सालभर बाद भी अब आम नागरिकों को इसकी आदत होने से इसी तरीके से जीवन जीने की आदत भी लगी है.

    18 मई 2020 को मिला जिले में पहिला बाधित  

    कोरोना विषाणु की दहशत सालभर बाद भी जिले में कायम है. विगत वर्ष 18 मई 2020 को हुई जांच में जिले में पहला कोरोना बाधित मरीज पाया गया था. इसके बाद कोरोनाबाधितों की संख्या बढने लगी है. साल भर में करीबन 10 हजार 141 कोरोना बाधितों की जिले में नोंद हुई है.