जिले में शराबबंदी लागू रहे, डा. बंग दम्पत्ती की अपील

  • कोरोना से लड़े, शराबबंदी से नहीं

गडचिरोली. जिले की शराबबंदी आदिवासी व महिलाओं के हित में है। सरकार  उसपर अमल प्रभावी रूप से करें, कोरोना से जिले के लोग मर रहे है, उन्हे बचाने के बजाएं शराबबंदी हटाने के लिए तत्काल समिति का प्रयास यह गलत है। इसलिए जिले में शराबबंदी लागू रखने की अपील महाराष्ट्र भूषण डा. अभय बंग व डा. रानी बंग ने मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, राज्यपाल कोश्यारी, शरद पवार, बालासाहेब थोरात से की है।

केंद्र सरकार व राज्य सरकार की ‘आदिवासी मद्यनीति’ यह आदिवासी क्षेत्र में शराब दूकान व बिक्री को मनाई करती है। वर्ष 1987 से 1993 ऐसे 6 वर्ष जिले में सर्वदलीय व्यापक जनआंदेालन व 600 गांव, 334 संगठना तीनों आदिवासी विधायकों के मांग करने के बाद वर्ष 1993 में जिले में शराबबंदी लागू हुई जो पिछले 27 वर्षो से लागू है। 2016 से यहां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जिलाव्यापी शराब-तमाकुमुक्ति अभियान ‘मुक्तीपथ’ शुरू है। फलस्वरूप महाराष्ट्र के औसतन के तुलना में जिले में शराब पर खर्च का प्रमाण काफी कम है

शराब का सेवन कर पुरुष काम नहीं कर सकते। नशेडी होते है, मरते है यह बात विश्व ने मान्य की है शराबबंदी के कारण देश के 6 राज्य में पुरूषों की शराब 40 प्रश से कम व महिलाओं पर के अपराध व अत्याचार 50 प्रश कम हुए है। ऐसा हार्वर्ड विवि व विश्व बैंक के विशेषज्ञों के खोज निबंध (अमेरिकन इकॉनॉमिक रिव्ह्यू) कहता है। यानी गडचिरेाली जिले में शराब शुरू करने पर महिलाओं पर अत्याचार डबल होंगे। निर्भयाकांड व हाथरस कांड यहां होंगे! इसलिए जिले में शराबबंदी लागू रखने की अपील की है। इस मांग पर राज्य के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष, राज्यपाल व शरद पवार क्या भूमिका लेंगे? ऐसा सवाल डा. बंग दंम्पत्ती ने उठाया है।