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    गडचिरोली. सिंचाई सुविधाओं के अभाव के कारण जिले में अधिकत्तर किसान खरीफ सीजन में धान फसलों की उपज लेते है. ऐसे में आगामी जून माह से खरीफ सीजन में कृषिकार्यो का बुआई से शुभारंभ होनेवाला है. जिससे अभी से किसान खेतों को बुआई हेतु तैयार करने के कार्यो में जुट गए है. नवतपा की तपीश जारी है, इसके बावजूद किसान कड़ी धूप में भी खेतों में पसिना बहां रहे है. खरीफ पूर्व तैयारियों में किसान मशगुल नजर आ रहा है.

    इस दौरान खेतों से कचरा, फसलों की सुखीं खुंटे आदि का प्रबंधक खरीफ के लि खेतों तो तैयार करने में किसान लगा है. बिते दिनों हुई बेमौसम बारिश के कारण कुछ किसानों ने खेतों की जुताई की है. मात्र अब भी अनेक किसानों के जोताई के कार्य प्रलंबित है. ऐसे में किसान खेतों में जुताई कार्य करने हेतु बारिश के इंतजार में लगे है. बतां दे कि, रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ हुआ है. इस दौरान कड़ी धूप व तुफानी हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना होती है. वहीं आगामी माह में किसानों के लिए महत्वपूर्ण माने जानेवाले मृग नक्षत्र भी प्रारंभ होगा. ऐसे में किसान नई उम्मीद के साथ खेतीकार्य में जुटे हुएं है. 

    214,004 हेक्टेयर पर होगी बुआई

    जिले में फसलों के बुआई क्षेत्र में वृद्धि हो रही है. इस वर्ष कृषि विभाग ने जिले में 214004 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारीत किया गया है. जिला प्रशासन ने खरीफ सीजन के नियोजन सभा हाल ही में ली गई. जिसमें आगामी खाद, बीज आदि का नियोजन किया गया है. जिले का मुख्य व्यवसाय खेती है.

    मात्र सिंचाई सुविधाओं के अभाव में किसान बारिश के पानी पर निर्भर रहते है. इस कारणवश जिले में अधिकत्तर लोग एक मौसमी यानी खरीफ सीजन में ही फसलें लेते है. जिससे समुचे किसान अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ खेती कार्य में जुट जाते है. करीब 4 माह के कठीण परिश्रम के बाद किसानों के झोली में फसलें आती है. मात्र इस दौरान किसानों को अनेक संकटों का सामना करना पड़ता है. 

    किसानों पर महंगाई की मार

    अस्मानी, सुलतानी संकटों का सामना कर किसान फसल उगाते है. ऐसे में कभी कबार उत्पादन खर्च भी निकलना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में अब किसानों को महंगाई की मार भी झेलनी पड़ेगी. इस वर्ष खाद के दामों में भारी वृद्धि हुई है, साथ ही इंधन के दाम भी बढ़ रहे है. बढ़ती महंगाई से किसानों की कमर टूटती नजर आ रही है. अनेक किसान महंगाई के चलते खेती करे या न करे, इस सोच में डूबे हुए है. खेतीकार्य में खाद काफी महत्वपूर्ण होता है.

    ऐसे में महंगा खाद खरीदना किसानों के बस में नहीं है. जिस कारण कुछ किसान अब सेंद्रीय खेती की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे है. वहीं मजदूरों के दाम भी बढ़ने की संभावना है. कोरोना महामारी से वित्तीय संकटों में फंसे किसानों को महंगाई भी झुलसा रही है. ऐसे में उपज के दाम बढ़ाने की मांग किसानों द्वारा हो रही है.