गर्म कपडे हुए दाखिल, मात्र ग्राहकों का अल्प प्रतिसाद

  • सडक किनारे लगे दुकाने
  • कोरोना के चलते इस वर्ष नेपाली, तिबेटी बिक्रेताओं से मोडा मुह

गड़चिरोली. इस वर्ष दिसंबर का प्रथम सप्ताह शुरू होने के बावजूद भी जिले में सर्दी का असर व्यापक मात्रा में दिखाई नहीं दे रहा है. जिससे नागरिकों ने गर्म कपडे अब भी आलमारी में ही रखे दिखाई दे रहे है. प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी गर्म कपडों की दुकाने शहर से सटी लगी है. मात्र ग्राहकों का अबतक प्रतिसाद नहीं देने से गर्म कपडों के बिक्रेता मायुस दिखाई दे रहे है. इस वर्ष जिले में नेपाली, तिबेटी दुकानदार जिले में दाखिल होते है. मात्र इस वर्ष कोरोना के कारण इन विदेशी बिक्रेताओं से मुंह मोडा होने का दिखाई दे रहा है. 

प्रति वर्ष करीबन नवंबर माह के मध्य तक जिले में शितकाल को शुरूआत होती है. मात्र इस वर्ष वातावरण में निरंतर हो रहे बदलाव के चलते दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक ठंड का असर दिखाई नहीं दे रहा है. तडके के दौरान कुछ मात्रा में शितलहरे बहती है. मात्र इसका प्रमाण काफी कम है. जिससे नागरिकों ने अबतक अपने उनी कपडे आलमारीयों में ही रखे है. जिले में विगत कुछ दिनों से कभी बदरीला मौसम तो कभी सुर्यदर्शन ऐसे विपरीत वातावरण दिखाई दे रहा है. विगत सप्ताह में जिले के कुछ क्षेत्रों में बेमौसम बारिश दर्ज की गई थी. जिससे ठंड का असर दिखने लगा था. मात्र अब स्थिती सामान्य है. इसके बावजूद सर्दी का मौसम शुरू होने के पूर्व ही शहर में सडक के किनारे उनी कपडा बिक्रेता विगत 15 दिनों से अपने दुकान लगाए है. 

छोटे बच्चों के कपडे, महिला व पुरूषों के विभीन्न रंग के स्वेटर, मफलर, कानटोपी, स्कार्फ, हाथ्मोजे, पैर के मोजे, युवकों को आकर्षित करनेवाले वुलन, रेक्झीन, लेदर ऐसे विभीन्न तरह के जर्किन की दुकाने सजे है. गडचिरोली शहर में इस वर्ष विदेशी उनी कपडे बिक्रेता दाखिल नहीं हुए है. मात्र राजस्थान, हरियाणा इन राज्यों के कुछ बिक्रेता विगत 15 दिनों से सडक के किनारे अपनी दुकाने लगाई है. मात्र वातावरण के बदलाव के कारण अबतक ग्राहकों का रूख इन दुकानों की ओर नहीं दिखाई दे रहा है. जिससे दुकानदारों में मासुसी का चित्र देखा जा रहा है. 

कोरोना के चलते नहीं आए नेपाली, तिबेटी 

प्रति वर्ष सर्दी का मौसम शुरू होने के पूर्व नेपाली, तिबेटी शहर के किनारे अस्थायी गर्म कपडे के दुकान लगाते है. मात्र इस वर्ष अनेक वर्षो की परंपरा खंडीत दिखाई दे रही है. विश्वभर में कोरोना महामारी के मद्देनजर इस वर्ष नेपाली तिबेटी बिक्रेता शहर की ओर रूख नहीं करने की बात कहीं जा रही है. .

ग्राहकों के अभाव में बिक्रेते निराश 

दुकानों में 150 से लेकर 600 रुपयों तक विभीन्न तरह के रंगबिरंगी उनी कपडे उपलब्ध है. विगत 15 दिनों से शहर में यह दुकाने सजे है. मात्र यह ठंड बेअसर होने से ग्राहकों ने इन दुकानों की ओर अपने कदम नहीं बढाएं है. ग्राहकों का अल्प प्रतिसाद होने के चलते इस वर्ष इस व्यवसाय को व्यापक फटका लगने का भय लग रहा है. – गणेश धूळसिंग, विक्रेता, राजस्थान