आधुनिक कृषि संसाधनों में वृद्धि, बैलों के स्थान पर कृषि यंत्र का उपयोग

    गड़चिरोली. बारिश का मौसम शुरू होते ही जिले के अधिकांश स्थानों पर किसानों ने खेती के कार्य आरंभ कर दिये है. दिनों दिन बदल रहीं जरूरतों के मद्देनजर जिले में आधुनिक खेती के प्रयोग में लगातार वृध्दि होती दिखायी दे रही है. पांच वर्ष पहले जो किसान पारंपारिक रूप से बैलों की सहायता से अपनी खेती कर रहा था.

    वह अब ट्रैक्टर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्र की सहायता से अपनी खेती करने में जूटा है. इस वर्ष जिले में खरीफ की फसल करीब पौने दो लाख एकड़ खेती की जा रही है. शुरूआती दौर में ही 80 प्रतिशत खेती में यंत्रों का प्रयोग होते दिखायी दे रहा है. मात्र इस दौरान किसानों की अपने परंपरागत पशुधन की ओर अनदेखी हो रही हैं, ऐसा प्रतीत होता है.

    पिछले 5 वर्षों से कृषि संसाधनों का उपयोग

    कृषक पिछले 4-5 वर्षों में लगातार धान समेत अन्य फसलों की बुआई, रोपाई, छिड़काव, कटाई और कुटाई जैसे सभी प्रकार के कृषि कार्य विभिन्न यंत्रो की सहायता से करते नजर आ रह है. सरकार द्वारा किसानों के विकास के लिये विशेष रूप से प्रयास किया जा रहा है. किसानों को खेती कार्य हेतु विभिन्न प्रकार के आधुनिक यंत्र उपलब्ध करा दिये जा रहे हैं.

    इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को इन आधुनिक यंत्रों का वितरण भी किया जा रहा है. सरकार की इन योजनाओं का लाभ लेते हुए किसान अपना और खेती का विकास करने के लिये बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे है. जिले के अनेक किसानों ने खेती का कार्य तत्काल हो इस आशा से ट्रैक्टर की सहायता से खेतों में हल चलाने का कार्य शुरू किया. मात्र खेती कार्यो के लिये ट्रैक्टरों की संख्या दिन-ब-दिन बढऩे के कारण सदियों से चली आ रही परंपरा यानि हल जोतने के कार्य में केवल बैलों का उपयोग करना अब कम होते दिखाई दे रहा है.

    बैलों से हल जोतने की परंपरा कायम

    एक तरफ शहरी क्षेत्र में कम समय में अधिक काम हो, इसलिये किसान बैंलों के बजाय ट्रैक्टर से खेत जोतते है. किंतु शहरी क्षेत्रों में अधिकतर ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. बैल द्वारा हल जोतने पर दिन भर में केवल एक या फिर डेढ़ एकड़ तक ही हल जोता सकता है. मात्र यही कार्य ट्रैक्टर की सहायता से करने पर एक घंटे में पुरा हो जाता है.

    इसमें मजदूरों की मजदूरी भी कम लगती है. लेकिन जिले के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र में आज भी बैलों से हल जोतने की परंपरा कायम है. और इस क्षेत्र के किसान बैलों से हल जोतना ही पसंद करने की बात कही जा रही है.