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  • 100 वर्षो से पुरानी सडकों के मरम्मत की आवश्यकता

सिरोंचा. तहसील के दूरस्त आंचलिक क्षेत्र झिंगानुर क्षेत्र में अनेक सड़कें खस्ताहाल  है। जिनकी मरम्मत की नितांत आवश्यकता है। उस क्षेत्र के अधिकांश सड़कें या तो काफी समय पहले बनाए गई है। साथ ही इनकी मरम्मत भी किये हुए वर्षो बीत गया है। इसके अलावा उस क्षेत्र के नालों पर बनाए गए पुल पुलियों का भी स्थिति जर्जर है। ऐसे ही उस क्षेत्र कि एक सड़क है जो कि झिंगानुर को रामासगुडम को जोडती है। जो इन  दिनो अपनी बदहाली पर आंसू बा रही है।

पंचायत मुख्यालय झिंगानुर को रामासगुडम को से जोडने वाली सडक दशकों पूर्व बनायी गई थी। इस सडक की मरम्मत कब हुई इसकी जानकारी स्थानीयों को नहीं है। मरम्मत के आभाव इन दिनों  सड़क देखने तक को नही मिलता है। सड़क के बारे में स्थानीय का कहना है कि जिस जगह से हो कर सड़क का निर्माण किया गया था। उन स्थानों पर आज के समय मे वह नजर नही आती है। मानो वह मार्ग अब जंगली एवं पगडंडी मार्ग के भान्ति नजर आती है। जिसकी मरम्मत समय समय पर न होने के चलते एक तरह से सड़क विलुप्त होती जा रही है। जिससे उस क्षेत्र के किस्टायापल्ली, कर्जेल्ली, रामासगुड़म, कोरला, कोप्पेला के ग्रामीणों को झिंगानुर पहुंचाना अत्यंत तकलीफदेह हो गया है।

  झिंगानुर को रामासगुडम से जोडने वाली सडक की लंबाई 12 किमी है। उक्त सड़क के मरम्मत करने के अलावा रास्ते मे जो छोटे छोटे नाले है। उन पर रपटा या फिर पुलियों का निर्माण किये जाने पर  उस क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों को आवगमन में  सुविधा मिलने लगेगी। इसके अलावा उन क्षेत्रों के ग्रामीण भी बारहमासी तौर पर मुख्यालय से जुड़ने मे सफल हो पायेंगे। सड़क एवं नालों पर पुलियों के आभाव में वह क्षेत्र अब भी विकास के पथ पर नहीं लौट पा रही है। साथ ही सीमावर्ती  होने के चलते उन क्षेत्रों के ग्रामीण पडोसी राज्य छत्तीसगढ से अपनी ज्यादातर जरूरतें पुरे करते है।

हाल ही के दिनों मे पूर्व विधायक एवं आविस के नेता दीपक आत्राम ने भी उस क्षेत्र का भ्रमण किया था। उस दरम्यान स्थानीय लोगों ने भी समस्याओं से उन्हे अवगत कराया था। जिसमे सड़क, बिजली प्रमुख मुद्दे थे। वास्तु स्थिति को जान दीपक आत्राम ने भी नाराजगी जताई थी। साथ ही मांग की थी की समय रहते स्थिति मे सुधार नही होने पर आन्दोलन किया जाएगा।