खरीफ फसल के कटाई में मशगूल अन्नदाता

  • धान व कपास को देख किसान प्रसन्न
  • गोसेखुर्द बांध ने डाला फसल पर असर

सिरोंचा. कृषी प्रधान तहसील सिरोंचा में सिंचाई की सुविधाओं के अविकसित होने के बावजूद मौजूदा आबादी का बड़ा हिस्सा कृषी पर आधारित होकर जीविका को तय करती है. जिस पर आधारित होकर यहां के अन्नदाता अपनी आर्थिक, समाजिक पक्ष को मजबूत करते है. तहसील में खरीफ फसलों के तहत मुख्यतः से धान, कपास को बड़े भूभाग पर उगाते है. इसके अलावा जेवारी, मूँग, मक्का के रुप मे भी फसलें उगायी जाती है. इन दिनो तहसील के अधिकांश क्षेत्रों मे फसल कटाई का दौर शुरु हो चुका है. जिसमें अन्नदाताओं के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर वर्ग मशगूल हुए है. इसका असर मुख्यालय के निर्माण कार्यों पर भी देखा जा रहा है. जहां मजदूरों के नही मिलने के चलते निर्माण कार्य प्रभावित हुए है.

सिरोंचा तहसील के 39 ग्राम पंचायतों में इन दिनो खरीफ फसलों के कटाई का कार्य जोरों पर जारी है. इसमें खासकर धान एवं कपास बड़े तादाद मे निकालने वाले फसलें है. जबकी इन दिनों तहसील में धान के अपेक्षा कपास के फसल मे स्थानीय किसान ज्यादा दिलचस्पी दिखाने लगे है. उनकी माने तो धान की अपेक्षा कपास में प्रति हेक्टेयर कम मानवबल, कम लागत, कम मशीनरी का प्रयोग होता है. फसल सोच के अनुरुप अच्छी निकली तो धान के अपेक्षा ज्यादा मुनाफा देने वाली है. इसके चलते कपास के सिंचाई रकबे मे हर वर्ष बढोत्तरी होने की बात सामने आयी है.

कटाई के इस दौर मे ग्रामीण क्षेत्रों मे पुरुषों के अपेक्षा महिलाएं अधिक सक्रीय भुमिका अदा कर रही है. जो तहसील के खेत खलियानों मे आसानी से देख सकते है. पिछड़े एवं अविकसित तहसील मे यह फसल कटाई के समय को ग्रामीनों के लिये अहम माना गया है. इस कार्य के बलबूते मजदूरवर्ग के आर्थिक पक्ष को मजबूती मिलती है. 

तहसील के रेगुंटा, जाफ्राबाद, मोयाबिनपेटा, अम्राजी, बामिणी, गर्कापेटा क्षेत्र के किसानों की माने तो अगस्त एवं सितंबर के मध्य गोसेखुर्द बांध से छोडे गए पानी के चलते रबी फसल प्रभावित हुई है. जिसका असर कपास एवं धान दोनों फसलो के प्रति हेक्टेयर उत्पादन के औसत पर भी दिखा है. जिससे किसानों को वित्तीय झटका लगा है. जबकी जीविका के अन्य विकल्पों के मौजूद नही होनें के चलते गोसेखुर्द बांध के दुष्प्रभाव ने स्थानीय किसानों को दुविधा मे डाला है.

जबकी आज के समय मे धान के फसल के कटाई मे मशीनरी हावी होते दिखाई पड़ रहे है. जिसमे धान के कटाई, मिन्जाई  मे हार्वेश्टर मशीन का उपयोग बड़े पैमाने पर होने लगा है. जिससे ग्रामीण मजदूर वर्ग भी व्याकूल दिखने लगे है. वही खेत के स्वामी मशीनरी का प्रयोग को जाएज मानते है. उनका तर्क है की हार्वेश्टर मशीन से कटाई, मिन्जाई का काम महज कुछ घंटो मे हो जाता है. जो कार्य मानव बल के द्वारा दिनों मे किया जाता है.  जानकारी के मुताबिक तहसील मे खरीफ़ फसल के तहत समूचे क्षेत्र मे लगभग 8319 हेक्टेयर भू क्षेत्र पर धान ,कपास की 7141 हेक्टेयर भू क्षेत्र पर खेती की गई है. जबकी अन्य फसलों जिनमें मक्का, जेवारी, मूँग, सब्जी बागान आदी के रुप मे भी अन्य फसलों को उगाया गया है.